|
एलटीटीई ने कुशल वार्ताकार खो दिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंकाई वायुसेना के हमले में मारे गए एसपी तमिलचेल्वन तमिल विद्रोहियों यानी एलटीटीई के वरिष्ठ नेताओं में से एक थे. वो हाल के वर्षों में सेना के हमले में मारे गए विद्रोहियों में सबसे वरिष्ठ नेता थे. 40 वर्षीय तमिलचेल्वन की मौत से एलटीटीई ने एक कुशल राजनीतिक वार्ताकर खो दिया है. कई वर्षों से वो विद्रोहियों की ओर से सार्वजनिक रूप से सरकार के साथ वार्ता करते आ रहे थे. श्रीलंका में वर्षों से चल रहे गृह युद्ध में सेना और विद्रोहियों दोनों पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं. वर्ष 1994 के बाद से एसपी तमिलचेल्वन ने नॉर्वे की मध्यस्था में श्रीलंका सरकार के साथ हुए लगभग सभी शांति वार्ताओं में तमिल विद्रोहियों का प्रतिनिधित्व किया. हाल के वर्षों में श्रीलंका और जेनेवा में हुए शांति वार्ताओं के दौरान कई बार मुझे उनसे मिलने का मौका मिला. उनका रवैया हमेशा दोस्ताना रहा और वे मुस्कुराते हुए सामने आते थे. हालाँकि उनके दुश्मनों का कहना था कि गर्मजोशी के साथ मिलने वाला ये शख़्स दरअसल निर्दयी विद्रोही नेता है. हाल ही में एलटीटीई के हवाले से मुझे बताया गया कि वो पश्चिमोत्तर में विद्रोहियों की एक इकाई का नेतृत्व कर रहे हैं. बढ़ता क़द अपने साथियों के विपरीत एसपी तमिलचेल्वन गुरिल्ला लड़ाकों की तरह नहीं दिखते थे. सूट पहने तमिलचेल्वन किसी अधिकारी की तरह सामने आते थे और वार्ता की मेज़ पर बड़े सहज़ दिखते थे. वो हमेशा एलटीटीई के सिद्धांतों के प्रति समर्पित रहे और उन्हें पूरा विश्वास था कि अल्पसंख्यक तमिल समुदाय के लिए अलग देश यानी ईलम का सपना ज़रूर साकार होगा. वो हमेशा दुनिया को ये बताने के लिए उत्सुक रहे कि पूर्वोत्तर श्रीलंका में तमिल आबादी के साथ क्या बर्ताव हो रहा है. दिसंबर, 2004 में आए विनाशकारी सूनामी के बाद उन्होंने तुरंत बीबीसी तमिल सेवा को फ़ोन कर बताया कि विद्रोहियों के क़ब्ज़े वाले इलाक़े में क्या हो रहा है. उन्होंने उस इलाक़े में चल रहे सहायता कार्यों का निरीक्षण किया और कई हलक़ों में उनके प्रयासों की सराहना की गई. अन्य विद्रोहियों की तरह उन्होंने भी सैन्य इकाई से शुरुआत की और अपनी सैन्य क्षमता के कारण ही वो आगे बढ़े. जल्दी ही वो एलटीटीई प्रमुख प्रभाकरण के गिने चुने सलाहकारों में शामिल हो गए. श्रीलंकाई मामलों के जानकार डीबीएस जयराज कहते हैं, "वह एलटीटीई नेता के काफी निकट थे. उनकी मौत से विद्रोही खेमे का रूख़ सख़्त हो सकता है." तमिलचेल्वन एक समय रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जाफ़ना प्रायद्वीप में विद्रोहियों के कमांडर भी रहे. वार्ताकार वर्ष 1993 में संघर्ष के दौरान घायल होने के बाद उन्हें राजनीतिक मामलों पर ज़्यादा ध्यान देने को कहा गया. यह विद्रोहियों के लिए बेहद अहम समय था. उस समय एलटीटीई को मुख्य रूप से सैन्य आंदोलन की तरह देखा जाता था और राजनीति में प्रवेश संगठन के लिए बड़ी चुनौती थी. राजनीतिक इकाई के नेता तमिलचेल्वन ने जल्दी ही अपने आप को नई ज़िम्मेदारी के अनुरूप ढाल लिया. वर्ष 1994-95 में श्रीलंका सरकार के साथ पहली बार हुई शांति वार्ता में उन्होंने एलटीटीई का प्रतिनिधित्व किया. पिछले साल जेनेवा में हुई विफल वार्ता में भी उन्होंने विद्रोहियों का पक्ष रखा. पिछले साल अपने मुख्य वैचारिक नेता एंटन बालसिंघम के निधन के बाद एलटीटीई ने उन्हें मुख्य वार्ताकार के रूप में पेश किया. |
इससे जुड़ी ख़बरें हवाई हमले में तमिल टाइगर नेता की मौत02 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'विद्रोहियों ने आठ जहाज़ तबाह किए थे'24 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस एयरबेस पर एलटीटीई का हमला, कई मरे22 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस सेना और विद्रोहियों के बीच संघर्ष07 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस एलटीटीई के अड्डे पर क़ब्ज़े का दावा02 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस कोलंबो से तमिलों को निकालने पर रोक08 जून, 2007 | भारत और पड़ोस दस तमिल विद्रोहियों को मारने का दावा05 मई, 2007 | भारत और पड़ोस तमिल विद्रोहियों ने फिर किया हवाई हमला29 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||