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अमिताभ ने जेल भेजने की चुनौती दी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में कृषि भूखंड ख़रीदने के मामले पर विवादों में घिरे अमिताभ बच्चन ने इशारों-इशारों में कह दिया उनकी समस्या राजनीति के कारण है. उन्होंने सरकार को चुनौती दी कि अगर वह समझती है कि उन्होंने कुछ ग़लत किया है तो उन्हें जेल में बंद कर दिया जाए. एक निजी टीवी चैनल के साथ इंटरव्यू में अमिताभ बच्चन इस विवाद पर खुल कर बोले. उन्होंने कहा, "अगर मीडिया, राज्य सरकार और प्रशासन ये समझते हैं कि उन्हें ज़मीन ख़रीदने का कोई हक़ नहीं तो वे मुझे गिरफ़्तार कर जेल में भेज दें." ग़ुस्साए अमिताभ बच्चन ने कहा कि अगर वे जेल जाएँगे तो इससे उन पर कोई असर नहीं होगा क्योंकि उन्हें ना तो कोई चुनाव लड़ना है और ना ही मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनना है. अमिताभ ने कहा कि वे तो सिर्फ़ अभिनेता हैं. अमिताभ ने यह भी कहा कि इस मामले में उन्हें ही क्यों घसीटा जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि इस देश में बहुत ऐसे लोग हैं जिनके पास कृषि भूखंड हैं और वे किसान नहीं हैं. उन्होंने किसान बनने की परिभाषा भी पूछी. कुछ महीने पहले बाराबंकी में कृषि भूखंड ख़रीदने के मामले में अमिताभ बच्चन उस समय विवादों में आ गए, जब फ़ैज़ाबाद की एक अदालत ने इसे फ़र्जी कह दिया. इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए अमिताभ बच्चन ने कहा, "मुझे बाराबंकी के ज़िलाधिकारी की ओर से एक प्रमाणपत्र मिला जिसमें इसकी पुष्टि की गई है कि ज़मीन मेरी है. मुझे इस प्रमाणपत्र की ज़रूरत पुणे में ज़मीन ख़रीदने के लिए थी. मैंने ये प्रमाणपत्र पुणे में अधिकारियों को दिया. उन्होंने उसका अध्ययन किया और फिर मुझे ज़मीन के क़ाग़ज़ात दे दिए." अमिताभ का कहना है कि दो-तीन साल बाद अब वे कह रहे हैं कि प्रमाणपत्र ग़लत है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह काम होता है. अमिताभ ने कहा कि सरकार बदलने के साथ पहले के निर्णय बदल दिए जाते हैं. मामला दरअसल, इस विवाद की शुरुआत होती है पुणे में बच्चन परिवार की ओर से एक आठ हेक्टेअर की ज़मीन को ख़रीदने की कोशिश से. पुणे के पास स्थित इस मवाल क्षेत्र में ज़मीन ख़रीदने के लिए ख़रीददार का किसान होना ज़रूरी है.
ज़मीन से संबंधित विवाद से जया बच्चन भी जुड़ी हुई हैं. बच्चन परिवार यहाँ पर एक फ़ार्म हाउस बनाना चाहता था. ख़ुद को किसान बताने के लिए उन्होंने जो काग़ज़ात जमा किए उनमें बताया गया था कि अमिताभ बच्चन बाराबंकी में एक भूखंड के मालिक हैं जो कृषि कार्य में इस्तेमाल होती है. ज़मीन के दस्तावेज़ के मुताबिक़ 11 जनवरी, 1983 से अमिताभ इस ज़मीन के मालिक हैं. इस दस्तावेज़ को जाँच के लिए संबंधित अधिकारी ने बाराबंकी के कलेक्टर के कार्यालय भेजा. तत्कालीन कलेक्टर ने इसकी जाँच की और पाया कि यह बात मूल दस्तावेजों में बाद में दर्ज की गई थी. जाँच में यह भी कहा गया कि जिस स्याही से अमिताभ का नाम सरकारी कागज़ों में दर्ज है वो नई है और लिखावट भी दूसरी है. इसके बाद संबंधित लेखपाल को बर्ख़ास्त कर दिया गया और इसे फ़र्ज़ी चकबंदी घोषित करते हुए निरस्त कर दिया गया. यह भी आरोप लगे कि अमिताभ को इस मामले में राज्य की तत्कालीन सरकार से अच्छे संबंधों के चलते यह लाभ मिला. हालांकि बाद में कलेक्टर बदलने के बाद अमिताभ को कुछ राहत मिली और उन्हें इस मामले में पेश होकर अपनी बात रखने का मौका दिया गया. वैसे इसी ज़मीन को लेकर एक और विवाद भी बच्चन परिवार के साथ जुड़ा है. वर्ष 2006 में जब जया बच्चन ने राज्यसभा सदस्यता के लिए अपना नामांकन दाखिल किया था तो उसके साथ जमा किए गए संपत्ति के ब्यौरे में इस ज़मीन का उल्लेख नहीं था. इस मामले पर चुनाव आयोग में एक याचिका दायर है जिस पर सुनवाई हो रही है. |
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