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अमिताभ को हाईकोर्ट से राहत मिली | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हाईकोर्ट ने फ़िल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन को अंतरिम राहत देते हुए फ़ैज़ाबाद अदालत के उस फ़ैसले को स्थगित रखा है जिसमें उनके नाम ज़मीन दर्ज करने को फ़र्ज़ी बताया गया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति डीपी सिंह ने अपने आदेश में कहा कि अमिताभ बच्चन की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करने के पर्याप्त आधार हैं. अदालत ने कहा कि अगले आदेश तक फ़ैज़ाबाद कमिश्नर कोर्ट का फ़ैसला स्थगित रहेगा. न्यायमूर्ति डीपी सिंह ने इस मामले में दोनों पक्षों को हलफ़नामा और जवाबी हलफ़नामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तिथि 23 जुलाई मुकर्रर की है. माना जा रहा है कि इस ताज़ा आदेश से अमिताभ बच्चन के नाम ज़मीन की रजिस्ट्री कराने के मामले में प्रस्तावित प्रशासनिक कार्रवाई को भी फिलहाल स्थगित किया जा सकता है. अमिताभ बच्चन ने अपनी याचिका में कहा था कि फ़ैज़ाबाद अदालत ने अपने कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर फ़ैसला दिया है और सुनवाई के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का भी मौका नहीं दिया गया. राजस्व अदालत का फ़ैसला इससे पहले फ़ैज़ाबाद की राजस्व अदालत ने अपने फ़ैसले में उत्तर प्रदेश के बाराबंकी ज़िले में अमिताभ बच्चन के नाम ज़मीन दर्ज कराने को फ़र्ज़ी और धोखाधड़ी ठहराया था. लेकिन अमिताभ दौलतपुर गाँव की इस ज़मीन पर अपना मालिकाना हक़ बनाए रखने के लिए निचली अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ हाईकोर्ट गए हैं. सरयू किनारे स्थित कुल दो बीघा पाँच बिस्वा ज़मीन अब उनके जी का जंजाल बन गई है. अमिताभ बच्चन का दावा है कि 10 सितंबर 1982 में एक चकबंदी अदालत ने उनके पक्ष में ज़मीन दर्ज करने का आदेश दिया था जिसके अनुपालन में 11 जनवरी 1983 को उनका नाम कलेक्ट्रेट की खतौनी में दर्ज हो गया. लेकिन मार्च, 2006 में जब अमिताभ बच्चन ने इस खतौनी की नकल लेकर तहसील के रिकॉर्ड में भी मालिकाना हक़ दर्ज करने का आवेदन किया तो बाराबंकी के ज़िलाधिकारी ने उनका दावा इस आधार पर ख़ारिज कर दिया कि दस्तावेजों में हेराफेरी करके उनके पक्ष में नकल जारी की गई. हालाँकि एक महीने बाद ही दूसरे ज़िलाधिकारी ने अमिताभ को राहत देते हुए उनका नाम अस्थायी तौर पर तहसील रिकॉर्ड में दर्ज करा दिया और उनसे अपने दावे के पक्ष में सबूत पेश करने को कहा. इन्हीं दोनों आदेशों के ख़िलाफ़ अमिताभ फैज़ाबाद कमिश्नर की अदालत में चले गए. अतिरिक्त कमिश्नर फैज़ाबाद ने भी एक जून को उनके ख़िलाफ़ फ़ैसला सुना दिया और कहा कि अमिताभ के नाम ज़मीन थी ही नहीं. |
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