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कैसे नहीं हैं अमिताभ बच्चन 'किसान' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महाराष्ट्र के पुणे ज़िले में ग़ैरक़ानूनी ढंग से हासिल ज़मीन को बचाने के लिए उत्तर प्रदेश के बाराबंकी ज़िले से किसान होने का फर्ज़ी प्रमाणपत्र बनवाना अमिताभ बच्चन के साथ-साथ कई अधिकारियों और कर्मचारियों के गले की फाँस बन गया है. अदालत की तरफ़ से इस मामले में धोखाधड़ी पाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने मामले में क़ानूनी कार्रवाई की बात कही है. जानकार सूत्रों के अनुसार इस मामले की प्रशासनिक जाँच में अनेक चौंकाने वाले गंभीर तथ्य सामने आए हैं और इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए कलक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम में विशेष रूप से एक कर्मचारी की तैनाती की गई. यह भी आरोप है कि तत्कालीन ज़िला मजिस्ट्रेट ने तहसीलदार और उप जिलाधिकारी को धमकाकर अमिताभ बच्चन को पुराना किसान होने का प्रमाणपत्र जारी करवाया. अमिताभ बच्चन को किसान होने का प्रमाणपत्र जारी कराने में समाजवादी पार्टी के एक राष्ट्रीय महासचिव, बाराबंकी से चुनकर आने वाले एक कैबिनेट मंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय में एक सचिव की भी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है. दरअसल, अमिताभ बच्चन को न तो बाराबंकी में खेती करनी थी, न उन्हें ज़मीन ही चाहिए थी. ज़मीन तो उनको महाराष्ट्र के पुणे ज़िले के मावल परगना में चाहिए थी. ये कृषि योग्य ज़मीन 24 एकड़ क्षेत्र में फैला एक फार्म हाउस है. सरकार ने एक बाँध बनाने के लिए काश्तकारों से इस इलाक़े में ज़मीन अधिगृहीत की थी. इसी में से 24 एकड़ जमीन अमिताभ बच्चन को 2000-2001 में बेच दी गई थी. महाराष्ट्र के क़ानून के मुताबिक कोई किसान ही कृषि योग्य ज़मीन खरीद सकता था इसलिए किसानों ने अमिताभ बच्चन के ख़िलाफ़ आंदोलन शुरू किया और 2005 के अंत में पुणे ज़िला प्रशासन ने मामले की जांच करते हुए अमिताभ बच्चन से पुराना किसान होने का सबूत मांगना शुरू किया. रिकॉर्ड कीपर का तबादला पिछले दस्तावेज़ों में फेरबदल को अंजाम देने के लिए नौ मार्च, 2006 को बाराबंकी के ज़िला मजिस्ट्रेट पर दबाव डालकर रिकॉर्ड कीपर बंशीलाल का तबादला करके उसकी जगह रामनरेश को तैनात किया गया.
रामनरेश नामक इस कर्मचारी ने नौ मार्च को अपना काम संभाला. दूसरे ही दिन दस मार्च को रिकॉर्ड में फेरबदल करके खतौनी की नकल दे दी गई. इसमें यह दिखाया गया कि 10 सितंबर, 1982 के चकबंदी के एक मुक़दमे में आदेश के अनुसार ग्राम सभा दौलतपुर की नवीन परती जमीन गाटा नंबर 702 को परती खाता से ख़ारिज करके अमिताभ पुत्र हरिवंश राय, 17 क्लाइव रोड, इलाहाबाद के नाम कर दी गई. अमिताभ बच्चन की ओर से नक़ल की यह कापी पुणे में दाख़िल की गई लेकिन पुणे में अधिकारियों ने इसकी सत्यता की पुष्टि कराने का निर्णय किया. दो दिन बाद बाराबंकी में अमिताभ बच्चन के प्रतिनिधि ने पुन: खतौनी की नक़ल लेकर डीएम को कागज़ात में अमल-दरामद कराने का दावा पेश किया. पुणे ज़िले की मावल तहसील के एसडीओ भानुदास गायकवाड़ ने 24 मार्च को बाराबंकी के डीएम और फतेहपुर तहसील को पत्र भेजा. पत्र में यह कहा गया है कि अमिताभ और अभिषेक बच्चन ने उनके पास ग्राम दौलतपुर का पुराना किसान होने का चकबंदी रिकॉर्ड पेश किया है. इस तथ्य की जांच करके प्रमाणपत्र की सत्यता के बारे में अवगत कराया जाए. इसके बाद ही बाराबंकी कलक्ट्रेट में हड़कंप मच गया और रिकॉर्ड दुरुस्त करने की प्रक्रिया शुरू हो गई. उप संचालक, चकबंदी आरपी शुक्ला ने 24 मार्च की अपनी जांच आख्या में लिखा कि अमिताभ बच्चन के पक्ष में यह एंट्री फर्ज़ी प्रतीत होती है क्योंकि उसकी लिखावट और पेन की स्याही आदि बाक़ी लिखावट से भिन्न है. जिस मुक़दमे में आदेश के आधार पर यह एंट्री दर्ज़ की गई उस मुक़दमे की फ़ाइल का भी कोई अता-पता नहीं. इस जांच आख्या के आधार पर तत्कालीन ज़िला मजिस्ट्रेट आशीष गोयल ने रिकॉर्ड कीपर रामनरेश को निलंबित करने, नक़ल प्राप्त करने के प्रार्थनापत्र को सील करने और सरकारी रिकॉर्ड की ग़लत प्रविष्टियाँ हटाकर रिकॉर्ड ठीक करने का आदेश दिया. लेकिन आश्चर्य इस बात का है कि तत्कालीन ज़िला मजिस्ट्रेट आशीष गोयल ने रिकार्ड कीपर रामनरेश को निलंबित करने के 24 मार्च के अपने ही आदेश पर तीन हफ़्तों तक अमल नहीं कराया. समझा जाता है कि आशीष गोयल ने अमिताभ बच्चन को ज़मीन का क़ब्ज़ा दिलाने और पुराना काश्तकार होने का प्रमाणपत्र देने से भी मना कर दिया. डीएम का तबादला परिणाम यह हुआ कि आशीष गोयल को हटाकर पीसीएस से प्रोन्नत आईएएस अधिकारी रमाशंकर साहू को नया डीएम बनाया गया. रमाशंकर साहू ने राजपत्रित अवकाश के दिन 11 अप्रैल को पद भार ग्रहण लिया.
सरकारी फ़ाइलों में फतेहपुर तहसील के तत्कालीन उप जिलाधिकारी महेंद्र सिंह और तहसीलदार अजय श्रीवास्तव के पत्र मौजूद हैं. इन पत्रों के अनुसार रमाशंकर साहू ने उन दोनों को डरा धमका कर 17-18 मार्च की पिछली तारीख़ों में दौलतपुर की उस दो बीघा पाँच बिसवा ज़मीन पर अमिताभ बच्चन का कब्ज़ा होने और उनकी तरफ से खेती कराए जाने का प्रमाणपत्र ज़ारी करवा दिया. श्री रमाशंकर साहू ने पदभार ग्रहण करने के दिन यानी 11 अप्रैल को तीन बजे आईपीएल गेस्ट हाउस में फतेहपुर तहसील के परगना मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह और तहसीलदार अजय श्रीवास्तव को बुलाया. इन दोनों अधिकारियों से नये डीएम ने यह लिखा लिया कि दौलतपुर की उस ज़मीन पर अमिताभ बच्चन का क़ब्ज़ा है और अमिताभ पुराने किसान हैं. पत्र के अनुसार डीएम रमाशंकर साहू ने 11 अप्रैल की ही रात 12 बजे फतेहपुर के परगना मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह को अपने आवास पर फिर से बुलाकर उनसे क़ाग़ज़ात पर अमिताभ के पक्ष में रिकॉर्ड लिखवाया. मगर डीएम रमाशंकर साहू ने जब दूसरे दिन 12 अप्रैल को फ़ोन करके परगना मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह को पुन: अपनी मुहर के साथ बुलाया तब उनका माथा ठनका. महेन्द्र सिंह को शक़ हुआ कि कहीं वह फँस न जाएँ. इसलिए महेंद्र सिंह ने अपने तहसीलदार अजय श्रीवास्तव से बात की और उनसे लिखवा लिया कि उन पर नाजायज़ दबाव डालकर अमिताभ बच्चन के पक्ष में यह फ़र्ज़ी दस्तावेज़ बनवाया गया. महेंद्र सिंह ने 12 अप्रैल को डीएम, बाराबंकी को संबोधित पत्र में साफ़-साफ़ लिख दिया कि उन पर दबाव डलवाकर अमिताभ बच्चन के पक्ष में अभिलेख बनवाए गए. महेंद्र सिंह ने 19 अप्रैल को डीएम रमाशंकर साहू को पुन: पत्र लिखकर कहा कि अमिताभ के किसान होने के संबंध में उनसे दबाव डालकर जो प्रमाणपत्र बनवाया था उसको रद्द कर दिया गया है इसलिए इसकी मूल प्रतिलिपि उनको वापस कर दी जाए. तत्कालीन तहसीलदार अजय कुमार श्रीवास्तव ने भी अपनी लिखित टिप्पणी में डीएम रमाशंकर साहू पर अनुचित दबाव डालकर प्रमाणपत्र लेने का आरोप लगाया. महेंद्र सिंह ने इसकी प्रतिलिपि ज़िला कलक्टर, पुणे और एसडीओ, मावल तहसील को भेज दी कि उनके हस्ताक्षर से ज़ारी प्रमाणपत्र को रद्द समझा जाए. महेंद्र सिंह छुट्टी पर चले गए. इसके बाद महेंद्र सिंह और तहसीलदार दोनों को फतेहपुर से हटा दिया गया. रमाशंकर साहू इस समय कुशीनगर के ज़िला मजिस्ट्रेट हैं. बीबीसी से फ़ोन पर बातचीत में रमाशंकर साहू ने उप जिलाधिकारी श्री महेंद्र सिंह के पत्रों में लिखित आरोपों को ग़लत बताया. अमिताभ के पक्ष में आदेश डीएम रमाशंकर साहू ने 24 अप्रैल को एक आदेश करके पूर्ववर्ती डीएम आशीष गोयल के आदेश को रोक दिया. उनका आदेश था कि अमिताभ बच्चन को सुनवाई का मौका देना ज़रूरी था. श्री साहू ने यह भी आदेश किया कि जब तक इसका अंतिम निस्तारण नहीं होता, ज़मीन श्री बच्चन के पक्ष में ही दर्ज रहेगी. अधिकारियों के अनुसार तत्कालीन डीएम रमाशंकर साहू ने ऊपर के लोगों को ख़ुश करने के लिए अमिताभ बच्चन के पक्ष में किसान होने का प्रमाणपत्र भी जारी करवा दिया लेकिन फैज़ाबाद के अपर आयुक्त के एक जून के फ़ैसले में पूरी कार्रवाई को निराधार, फ़र्ज़ी और धोखाधड़ी माना गया. फैज़ाबाद के न्यायालय अतिरिक्त कमिश्नर बिद्यासागर प्रसाद ने अपने इस आदेश में लिखा है कि अमिताभ बच्चन को ज़मीन का मालिक़ाना हक़ देने के लिए खतौनी में की गयी प्रविष्टि निराधार, फ़र्ज़ी और धोखाधड़ी से बनाई गई है. शासन के उच्च अधिकारियों को कहना है कि न्यायालय के इस आदेश के बाद आपराधिक मुक़दमा चलाने का पर्याप्त आधार बनता है. उधर महाराष्ट्र सरकार ने कह दिया है कि इस फ़ैसले के बाद अमिताभ बच्चन की पुणे की ज़मीन ज़ब्त करके वहाँ भी उन पर मुक़दमा चलाया जा सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें भू आवंटन पर सपा-कांग्रेस आमने-सामने29 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस नोएडा में भूमि आवंटन की सीबीआई जाँच28 मई, 2007 | भारत और पड़ोस 'उपहार की कार' पर तकरार08 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस 'किसान' अमिताभ की ज़मीन... 29 मई, 2007 | भारत और पड़ोस 'अमिताभ के नाम ज़मीन आवंटन फर्ज़ी'01 जून, 2007 | भारत और पड़ोस 'अमिताभ पर चल सकता है मुक़दमा'03 जून, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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