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नोएडा में भूमि आवंटन की सीबीआई जाँच | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा के चर्चित भूमि आवंटन विवाद मामले की जाँच सीबीआई से करवाने का सैद्धांतिक स्तर पर निर्णय ले लिया है. वहीं राज्य की खागा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी को जीत हासिल हुई है. सोमवार को भूमि आवंटन विवाद पर पत्रकारों को अवगत कराते हुए राज्य के प्रमुख सचिव के चंद्रमौली ने बताया कि राज्य सरकार ने इस आवंटन की कथित गड़बड़ियों की जाँच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी के नेता अमर सिंह ने बीबीसी से कहा, "नोएडा में कोई घोटाला हुआ ही नहीं है तो जाँच का सवाल ही नहीं उठता. क़ानून से ऊपर कोई नहीं. अगर हमारी सरकार ने कुछ ग़लत किया होगा तो हम क़ानूनी कार्रवाई का सामना करेंगे." ग़ौरतलब है कि वर्ष 2004 में तत्कालीन राज्य सरकार ने नोएडा में 600 से ज़्यादा लोगों को भूखंड आवंटित किए थे. इस भूमि आवंटन पर आरोप लगा था कि इसमें राज्य सरकार का रवैया भेदभावपूर्ण रहा है और राज्य सरकार ने कई प्रभावशाली लोगों को इससे लाभान्वित किया है. आवंटन में धांधली का आरोप लगाने वालों का कहना है कि राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर सिंह ने इन आवंटनों में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई जजों के रिश्तेदारों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और कुछ पत्रकारों को नियमों को ताक पर रखते हुए ज़मीन आवंटित करवाई. पिछले दिनों यह मामला तब प्रकाश में आया जब केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने 29 अप्रैल को एक पत्रकार वार्ता में राज्य सरकार पर नियमों की अनदेखी करते हुए ज़मीन आवंटन करने का आरोप लगाया था. उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री पर अपने कोटे के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया था. विवाद वैसे इस भूमि आवंटन पर विवाद 2004 में ही शुरू हो गया था. आवंटन के बाद कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि आवंटन के लिए लाटरी के जरिए जब लोगों को ज़मीन दी जानी थी, उस वक्त उसमें गड़बड़ियाँ करके पहले से तय लोगों को लाभ पहुँचाया गया. यह विवाद और आगे बढ़ा और इस बारे में एक जनहित याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर कर दी गई.
याचिका पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने इन आवंटनों रद्द करने और पूरे मामले की सीबीआई जाँच करवाने के निर्देश राज्य सरकार को जारी किए. इस फैसले के बाद राज्य सरकार ने आवंटनों को तो रद्द कर दिया पर सीबीआई जाँच के फैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट से स्थगन आदेश ले लिया था. उपचुनाव परिणाम उत्तर प्रदेश की खागा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में राज्य की सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी को झटका लगा है. इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी ने जीत हासिल की है. कांग्रेस प्रत्याशी दूसरे और बसपा प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहे. पिछली बार इस विधानसभा सीट पर बसपा प्रत्याशी को जीत हासिल हुई थी. बसपा प्रत्याशी की हार पर पार्टी ने सफाई देते हुए कहा है कि उन्होंने चुनाव के दौरान ज़्यादा प्रचार नहीं किया ताकि कांग्रेस की महिला प्रत्याशी को इस सीट से जीत हासिल हो सके. ग़ौरतलब है कि राज्य में सात चरणों में हुए चुनाव के दौरान खागा के चुनावों को टालना पड़ा था क्योंकि मतदान से कुछ दिन पहले ही यहाँ से कांग्रेस के प्रत्याशी की एक हादसे में मौत हो गई थी. | इससे जुड़ी ख़बरें भू आवंटन पर सपा-कांग्रेस आमने-सामने29 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस मुलायम मामले की सुनवाई से इनकार16 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस नहीं मिली मुलायम सिंह को राहत13 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस सुप्रीम कोर्ट ने पेट्रोल पंप लाइसेंस रद्द किए12 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस नक्सलवादियों से बातचीत कल भी15 अक्तूबर, 2004 | भारत और पड़ोस मायावती की जाँच के आदेश | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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