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शुक्रवार, 15 अक्तूबर, 2004 को 03:34 GMT तक के समाचार
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नक्सलवादियों से बातचीत कल भी
पीडब्ल्यूजी नेता
पीडब्ल्यूजी नेताओं ने सशस्त्र संघर्ष छोड़ने का वादा नहीं किया है
भारत में आंध्रप्रदेश सरकार और नक्सलवादी विद्रोहियों के बीच पहली बार सीधी बातचीत हो रही है.

पहले दिन शुक्रवार को दस घंटे की बातचीत के बाद दोनों पक्ष बातचीत आगे बढ़ाने पर राज़ी हुए हैं.

नक्सलवादियों के नेता रीमकृष्णा और राज्य के गृहमंत्री जना रेड्डी ने पहले दिन की बातचीत को दोस्ताना और सदभाव के माहौल में हुई बातचीत बताया.

लेकिन हैदराबाद में बीबीसी संवाददाता उमर फ़ारूक़ का कहना है कि एक मुद्दे पर दोनों पक्षों में कुछ मतभेद उभरने की संभावना है.

नक्सलवादी ज़ोर दे रहे हैं कि उन्हें गाँवों में हथियारों के साथ ही घूमने-फिरने की इजाज़त दी जाए लेकिन सरकार का कहना है कि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए.

गृहमंत्री रेड्डी ने कहा कि जब तक इस मुद्दे पर कोई एक राय नहीं बन जाती तब तक कोई समझौता संभव नहीं है.

उन्होंने कहा कि एजेंडे के अन्य मुद्दो के साथ-साथ इस मुद्दे पर भी बातचीत जारी रहेगी.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेता रामकृष्णा ने कहा कि संघर्षविराम पर एक व्यापक समझौता हो गया है.

उन्होंने कहा कि हथियार रखने के मुद्दे पर क्या इसी दौर में बातचीत होगी, यह सरकार पर निर्भर करेगा.

रामकृष्णा ने कहा कि उनके संगठन के सदस्य गाँवों में हथियारों के साथ ही घूम-फिर रहे हैं और वे आगे भी ऐसा ही करते रहेंगे.

संघर्षविराम की अवधि के बारे में रामकृष्णा ने कहा कि जब तक बातचीत जारी रहेगी, संघर्षविराम भी जारी रहेगा.

नया दल

राजधानी हैदराबाद में शुक्रवार सुबह शुरू हुई तीन दिन की यह वार्ता बंद कमरे में हो रही है.

राज्य में 1980 से ही सक्रिय पीपुल्स वार ग्रुप ने गुरुवार को एक अन्य विद्रोही गुट माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर के साथ विलय कर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (माओवादी) नामक नए संगठन की स्थापना की है.

माओवादी विद्रोही कई राज्यों में साम्यवादी व्यवस्था के लिए सशस्त्र आंदोलन चला रहे हैं.

बातचीत में नवगठित पार्टी का प्रतिनिधित्व पीपुल्स वार ग्रुप के राज्य सचिव अक्कीराजू हरगोपाल उर्फ़ रामकृष्णा कर रहे हैं सरकार का प्रतिनिधित्व राज्य के गृह मंत्री के जना रेड्डी कर रहे हैं.

इनके अलावा बुद्धिजीवियों और मानवाधिकारवादियों के एक दल को भी चर्चा में शामिल किया जा रहा है.

दोनों पक्षों के बीच भूमि वितरण, लोकतांत्रिक अधिकार और अर्थव्यवस्था के विश्व बैंक निर्देशित मॉडल जैसे विषयों पर चर्चा होगी.

विद्रोही नेता रामकृष्णा ने कहा है कि सशस्त्र संघर्ष का मुद्दा बातचीत का विषय नहीं होगा.

उनके अनुसार आम लोगों को अधिकार सशस्त्र संघर्ष से ही मिल सकता है.

राज्य सरकार ने रामकृष्णा के इस बयान को ज़्यादा तूल नहीं देने का संकेत दिया है.

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