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मंगलवार, 02 मई, 2006 को 10:44 GMT तक के समाचार
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अभी भी बच्चों में भूकंप का ख़ौफ़

अभी भी भूकंप प्रभावित इलाक़ों में पुनर्निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है
भारतीय कश्मीर में पिछले साल आठ अक्तूबर को आए भूकंप को आठ महीने हो चुके हैं लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में बच्चे अब तक ख़ौफ़ से नहीं निकल पाए हैं.

उड़ी क्षेत्र के सालमाबाद गाँवों में श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद मार्ग पर स्कूल से घर लौट रहे कुछ बच्चों को भूकंप के बारे में एक बात याद है.

मोहम्मद रफ़ीक़ आठवीं जमात के विद्यार्थी हैं. उनका कहना है, "भूकंप आया था. घर गिर गए. लोग मर गए. स्कूल गिर गए."

एक अन्य विद्यार्थी रमीज़ अहमद कहते हैं, “जब भूकंप आया था ज़मीन हिल रही थी. पूरे मकान टूट गए थे. लोग मर गए थे. एक दूसरे का पता नहीं था कौन कहाँ पर है और लोग डर गए थे.”

इन बच्चों ने बताया कि वह डर अब भी इनके मन में मौजूद है. मोहम्मद रफ़ीक़ का कहना है, "हमें यह डर लगता है कि अगर फिर से भूकंप आए तो हम मर जाएँगे.”

छठी जमात के विद्यार्थी मोहम्मद असरफ़ कहते हैं, “डर लगता है लेकिन स्कूल जाना पड़ता है. एक अन्य बालक कहता है कि “हम जल्दी-जल्दी घर जाते हैं.”

डर

कलगई गाँव की महिला राज बी का कहना है कि उनके पोते-पोतियाँ अकेले स्कूल जाने से डरते हैं. “ये बच्चे घर से दूर खेलने भी नहीं जाते. इन्हें डर लगता है कि कहीं भूकंप न आ जाएँ.” राज बी कहती हैं कि उनके पोते-पोतियाँ रात को ठीक से नहीं सो पाते.

 ये बच्चे घर से दूर खेलने भी नहीं जाते. इन्हें डर लगता है कि कहीं भूकंप न आ जाएँ.”
राज बी

बच्चे की बात अलग कई युवकों का भी कहना है कि उन्हें डरावने सपने आते हैं .

राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के निर्देशक मुज़फ़्फ़र अहमद का कहना है कि भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की शिक्षा के लिए कॉन्सलर्स तैयार किए जा रहे हैं.

वे कहते हैं, "हम नए नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ़ मेंटल साइंस बंगलौर की सहायता से अपने डॉक्टरों को प्रशिक्षित कराया. अब ये डॉक्टर पैरा-मेडिकल कर्मचारियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं.”

मुज़फ़्फ़र ने बताया कि कुल 250 कॉन्सलर्स तैयार किए जा रहे हैं ताकि प्रति गाँव में एक कॉन्सलर तैनात किया जा सके. उन्होंने बताया कि इन कॉन्सलर्स की तैनाती 15 मई से शुरू होगी.

कश्मीर घाटी में भूकंप से दो उप ज़िला अस्पतालों सहित 58 स्वास्थ्य केंद्र तबाह हो गए. इनमें से एक का भी अब तक पुनर्निर्माण नहीं हुआ है.

इसी प्रकार भूकंप में 400 स्कूल पूरी तरह तबाह हो गए जबकि अन्य 400 से अधिक स्कूली इमारतों को नुक़सान पहुँचा.

केंद्रीय ग्राम सचिव वीके दुग्गल ने बताया है कि इनके पुनर्निर्माण का कार्य इस वर्ष शुरू होने की कोई संभावना नहीं. क्योंकि राज्य सरकार के पास पैसा नहीं और केंद्र से जब पैसा आएगा तो इस वर्ष के अंत तक ही आएँगे.

बच्चे अभी भी सदमे से उबर नहीं पाए हैं

प्रभावित क्षेत्रों के शिक्षा केंद्रों में भूकंप के कारणों के बारे में बहुत कम चर्चा हो रही है. बातचीत में एक बच्चे ने कहा कि "भूकंप ज़मीन में गैस के फटने से आता है.”

अन्य सभी बच्चों ने भूकंप का कारण यह बताया कि लोग नए गुनाह या पाप किए थे. ऐसा इन्होंने अपने माता-पिता से सुना है.

शकील अहमद जो आठवीं में पढ़ता है उसका कहना है “लोगों ने गुनाह किए थे, नमाज़ नहीं पढ़ते थे, रोज़ा नहीं रखते थे, चोरी करते थे और झगड़ा करते हैं.”

मैंने शकील से पूछा कि क्या उसने भी कोई गुनाह किया था. वे वोले “हाँ मैं ग़ाली देता था.” अब वे किसी को ग़ाली नहीं देते. लेकिन वे कहते हैं कि बच्चे अब भी स्कूल में लड़ते-झगड़ते हैं.

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