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तीन महीने बाद भी भूकंप प्रभावित बेहाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और अन्य इलाक़ों में आए विनाशकारी भूकंप के तीन महीने बाद भी प्रभावित लोग कड़कड़ाती सर्दी में टेन्ट या किसी अस्थायी शिविरों में पनाह लिए हुए हैं. राहत कर्मियों का कहना है कि भीषण ठंड में लोगों की सुविधा का ख़्याल रखा जा रहा है. लेकिन पिछले हफ़्ते आई बारिश और बर्फबारी के कारण मुश्किलें पेश आ रही हैं. पिछले तीन महीनों में पाकिस्तान सेना ने भूकंप प्रभावित इलाक़ों को सब-सेक्टर में बाँट दिया है ताकि राहत कार्य प्रभावी ढंग से हो सके. इन इलाक़ों में सेना अंतरराष्ट्रीय और अन्य राहत संगठनों के साथ मिलकर काम कर रही है. संयुक्त राष्ट्र का आकलन है कि अभी भी 24 लाख लोगों के लिए राहत कार्य जारी रखना ज़रूरी है. आकलन इनमें से 20 लाख लोग तो निचले इलाक़े में रहते हैं और बर्फबारी के कारण इन्हें काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.
संयुक्त राष्ट्र को अप्रैल तक राहत कार्य चलाने के लिए जितनी राशि की आवश्यकता है, उसमें से उसे आधे ही मिले हैं. आम तौर पर यहाँ भूकंप प्रभावितों को जीने के लिए आवश्यक चीज़ें मिल रहीं हैं, लेकिन इससे ज़्यादा उन्हें कुछ नहीं मिल रहा. सैनिक और राहतकर्मी पहाड़ी इलाक़ों में शिविर बना रहे हैं लेकिन ख़राब मौसम के कारण इसमें बाधा आ रही है. भारी बर्फबारी और बारिश के कारण कुछ दिनों के लिए राहत कार्य रोकना पड़ा था. इस कारण कई टेंट बह गए तो कुछ बर्बाद हो गए. अभी तक कोई महामारी तो नहीं फैली है लेकिन बीमारी फैलने का ख़तरा बना हुआ है. संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों का कहना है कि पिछले पाँच हफ़्तों के दौरान क़रीब 20 लोगों की निमोनिया से मौत हो गई है. | इससे जुड़ी ख़बरें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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