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शुक्रवार, 06 जनवरी, 2006 को 10:52 GMT तक के समाचार
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'कश्मीर में और भूकंप आ सकते हैं'

कश्मीर क्षेत्र में भूकंप प्रभावित
पाकिस्तान में हज़ारों लोग भूकंप से बेघर हुए हैं
दुनिया के अग्रणी भूकंप वैज्ञानिकों में से एक रोजर बिलहाम ने आगाह किया है कि कश्मीर क्षेत्र में अगले पचाल साल में कुछ और भीषण भूकंप आने की बहुत संभावना है.

रोजर बिलहाम ने बीबीसी को बताया कि कश्मीर क्षेत्र में आठ अक्तूबर 2005 को आए भयंकर भूकंप से भी ज़्यादा ख़तरनाक भूकंप आ सकते हैं.

ग़ौरतलब है कि उस भूकंप में क़रीब 73 हज़ार लोगों की जान चली गई और लाखों लोग बेघर हो गए.

रोजर बिलहाम भूकंप आने के बाद कश्मीर के प्रभावित इलाक़ों में ही काम कर रहे हैं.

रोजर बिलहाम को हिमालय क्षेत्र में भूकंप विज्ञान पर विशेषज्ञ माना जाता है. रोजर ने कहा कि उन्होंने 500 साल के इतिहास का अध्ययन किया है और उससे पता चलता है कि इस क्षेत्र में पृथ्वी की परतों में बहुत बड़ी मात्रा में ऊर्जा इकट्ठी हो गई है लेकिन उसका वितरण असमान तरीके से हो रहा है.

"इसका मतलब है कि जब पृथ्वी की परतों में हलचल होगी तो वह बहुत बड़ी होगी और उससे भीषण भूकंप आएंगे."

रोजर ने कहा, "हमारे अध्ययन में दरअसल पता चलता है कि ऐसे चार स्थान हैं जहाँ 8.2 अंक से भी ज़्यादा तीव्रता के भूकंप आ सकते हैं. उनमें से कश्मीर भी है और वहाँ 8 अंक से भी ज़्यादा तीव्रता के भूकंप आ सकते हैं."

रोजर बिलहाम ने बताया कि कश्मीर क्षेत्र में 1501 में भीषण भूकंप आया था, "हम श्रीनगर के अलावा अन्य क्षेत्रों में हुई भारी तबाही के बारे में ज़्यादा नहीं जानते."

भविष्य की योजना

बिलहाम ने कहा कि पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय होना चाहिए जहाँ आठ अक्तूबर 2005 के भूकंप के बाद बड़े पैमाने पर पुनर्वास कार्य चल रहे हैं.

क्या समय लंबा है...
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 कश्मीर के इतिहास से हम जो जानते हैं उससे पता चलता है कि अगले पचास साल में लगातार कई भूकंप आ सकते हैं. ज़ाहिर है कि किसी नेता के लिए पचास साल की अवधि काफ़ी लंबी नज़र आती है लेकिन उपयुक्त इमारतें वग़ैरा बनाने के लिए इतना समय बस ठीक है.
रोजर बिलहाम

"सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि जो भी नए मकान वग़ैरा बनें वे अगले भूकंप का असर सहन करने में सक्षम हों."

बिलहाम ने कहा, "कश्मीर के इतिहास से हम जो जानते हैं उससे पता चलता है कि अगले पचास साल में लगातार कई भूकंप आ सकते हैं. ज़ाहिर है कि किसी नेता के लिए पचास साल की अवधि काफ़ी लंबी नज़र आती है लेकिन उपयुक्त इमारतें वग़ैरा बनाने के लिए इतना समय बस ठीक है."

बिलहाम ने इस आम राय को ख़ारिज किया कि एक बार जहाँ भूकंप आ जाता है वहाँ जल्दी से दूसरा भूकंप नहीं आता है.

उन्होंने कहा, "मैं आपको भारत के अंडोमान और निकोबार द्वीप समूह का उदाहरण दे सकता हूँ जहाँ 1848, 1865 और 1881 में भूकंप आए थे."

"ये लगभग उसी तीव्रता के भूकंप थे जो आठ अक्तूबर को कश्मीर में आया था. उनमें से कुछ तो उससे भी ज़्यादा बड़े यानी 7.9 की तीव्रता के थे."

बिलहाम ने कहा कि कोई यह सोच सकता है कि उस क्षेत्र में अगले 500 सालों में कोई भूकंप नहीं आया होगा लेकिन उसी क्षेत्र में 120 साल बाद भीषण भूकंप आया था.

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