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बर्फ़बारी से राहत कार्यों में बाधा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय प्रशासित कश्मीर और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हो रही भारी बारिश और बर्फ़बारी के कारण वहाँ भूकंप प्रभावितों के लिए चल रहे राहत कार्यों में बाधा पहुँच रही है. अक्तूबर में आए भूकंप के कारण कश्मीर में तीस लाख से ज़्यादा लोग बेघर हो गए थे. खराब मौसम के चलते सड़क मार्ग बंद हो गए हैं. हेलिकॉप्टर भी उड़ान नहीं भर रहे. कई जगह शर्णार्थी शिविरों में टेंट पानी में बह गए हैं. भारतीय प्रशासित कश्मीर के उड़ी ज़िले में अधिकारियों ने कहा है एक घर ढहने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. बारामुला और कुपवाड़ा ज़िले भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय मार्ग भी बंद हो गया है. वहीं पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में भी खराब मौसम के चलते शनिवार से राहत कार्य बंद पड़े हैं. सड़क मार्ग बंद पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद तक जाने के लिए सिर्फ़ एक ही मार्ग खुला है. मुज़फ़्फ़राबाद के पास एक शर्णार्थी शिविर में रहने वाली शकीना ने बताया, "सब कुछ गीला हो गया है. अब हम इन टेंटों में नहीं रह सकते." अधिकारियों का कहना है कि नीलम और झेलम घाटियों में हालत काफ़ी खराब है. पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में भूकंप प्रभावित सभी इलाक़े एक दूसरे से कट गए हैं. कई लोग जो अभी भी बर्फ़ से घिरे इलाक़े में रह रहे हैं उनमें से कुछ ने अपने लिए अस्थायी घर बना लिए हैं. मुज़फ़्फ़राबाद के पास ऐसे ही एक पहाड़ी इलाक़े में रहने वाले वाजिद अली खान ने कहा, " मैं पहाड़ी छोड़कर नीचे टेंटों में रहने नहीं जाऊँगा. मुझे अपने मवेशियों का भी ख़्याल रखना है, उन्हें तो साथ लेकर टेंट में रहने नहीं जा सकता." सैनिक अधिकारियों का कहना है कि फ़िलहाल चिंता की बात नहीं है. अधिकारियों ने बताया कि भूकंप प्रभावित इलाक़ों के करीब 100 वितरण केंद्रों में ज़रूरी सामग्री सात दिनों तक के लिए जमा है. | इससे जुड़ी ख़बरें दो महीने बाद मलबे में ज़िंदा मिली13 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस भूकंप पीड़ितों को अब झीलों से ख़तरा07 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान में सहायता राशि की अपील03 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस भूकंप प्रभावितों की स्थिति पर चिंता24 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान को उम्मीद से ज़्यादा राशि19 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'हम अभी भी डरते हैं..भागते हैं...'14 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है'08 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'लोगों को सर्दी से बचाना है प्राथमिकता'06 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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