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भूकंप ने कहीं का नहीं रखा है इन बच्चों को | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी पाँच साल के ज़फ़र ख़ान को ले जानेवाला कोई नहीं है. पिछले एक सप्ताह से अस्पताल का वार्ड उनका घर बना हुआ था. डॉक्टरों को इस घायल बच्चे के परिवार के बारे में कोई अता-पता नहीं है. उसे भूकंप से बुरी तरह प्रभावित उड़ी के एक गाँव से श्रीनगर के अस्पताल में हेलिकॉप्टर की मदद से पहुँचाया गया था. इस बच्चे के पड़ोसियों ने कुछ गाँववालों को बताया था कि ज़फ़र के पिता पिछले सप्ताह आए भूकंप में मारे गए. भूकंप ने उड़ी के उसके गाँव दलांजा को तबाह कर दिया है. डॉक्टरों को पता चला था कि ज़फ़र की माँ लगभग अंधी थीं और उसके दो भाई सज्जाद और निसार हैं. इसके अलावा ज़फ़र के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है. उसकी देखभाल में लगे डॉक्टर उससे और कोई सवाल नहीं पूछ रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं बच्चे को मनोवैज्ञानिक रूप से धक्का न लगे. अस्पताल में ज़फ़र के पास खिलौनों की भरमार है और अस्पताल आनेवाले लोग उसके पास खिलौने लेकर आते हैं. डॉक्टरों ने ज़फ़र का बिस्तर दो भाइयों 12 वर्षीय इम्तियाज़ और 6 वर्षीय इश्तियाक़ के बगल में लगाया है. ये दोनों भाई भी ज़फ़र के गाँव के हैं और भूकंप के कारण मकान गिरने के कारण घायल हो गए थे. तीनों बच्चे बेहतर हो रहे हैं. एक काउंसलर ने बताया कि इम्तियाज़ ने बताया है कि उसकी एक बहन की मौत हो गई है, उसके दोस्त मारे गए हैं और उसके बुज़ुर्गों की भी इस भूकंप ने जान ले ली है. ज़फ़र इनमें सबसे सक्रिय बच्चा है. वो कहता है, '' मैं घर जाना चाहता हूँ. घर बेहतर जगह है.'' उसके साथी इम्तियाज़ और इश्तियाक़ तो जल्द ही अपने पिता के साथ वापस चले जाएंगे लेकिन ज़फ़र को ले जानेवाला कोई नहीं है. अस्पताल के एक कार्यकर्ता आरज़ू ने बताया, ''अगर कोई आगे नहीं आया तो ज़फ़र को यूथ हॉस्टल में भेज दिया जाएगा.'' ज़फ़र अकेला बच्चा नहीं है बल्कि ऐसे बच्चों की बड़ी संख्या है जिनका भविष्य अंधकार से घिरा है. |
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