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पीड़ितों के लिए 'तम्बुओं वाले शहर' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान की सरकार ने कहा है कि पिछले सप्ताह आए भूकंप के कारण बेघर हुए लोगों के लिए कई ऐसे शहर बसाए जाएँगे, जहाँ लोगों के रहने के लिए तम्बू लगे होंगे. पाकिस्तान के सूचना मंत्री शेख़ रशीद अहमद ने बीबीसी को बताया कि तम्बुओं वाले ऐसे पाँच शहर राजधानी इस्लामाबाद के निकट बसाए जाएँगे. इसके अलावा रावलपिंडी और मुज़फ़्फ़राबाद में भी 'टेंट सिटी' बनाई जाएँगी. शेख़ रशीद ने बताया कि भूकंप के बाद प्रभावित इलाक़ों से बड़ी संख्या में लोग इन इलाक़ों में पहुँच गए हैं. उन्होंने बताया कि इन बस्तियों में खाना, पानी और बिजली की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी. इस सिलसिले में पाकिस्तान की कैबिनेट ने गुरुवार को फ़ैसला किया. शेख़ रशीद ने बताया कि टेंट सिटी बनाने के लिए बड़ी संख्या में तम्बू अन्य देशों से मँगाए जा रहे हैं. सूचना मंत्री ने उम्मीद जताई कि एक-दो दिनों में ऐसी बस्तियाँ बना ली जाएँगी. सूचना मंत्री शेख़ रशीद ने यह भी बताया कि भूकंप में कम से कम पाँच सौ सैनिक मारे गए हैं. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के कई पुलिस स्टेशन नष्ट हो गए हैं और अस्पताल भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं. यह पहली बार है कि पाकिस्तान की सरकार ने इतना विस्तृत विवरण दिया है. शेख़ रशीद अहमद ने बताया कि भूकंप से प्रभावित ज़्यादातर दूर-दराज़ के इलाक़ों में राहतकर्मी पहुँच गए हैं लेकिन नीलम घाटी का संपर्क अभी भी अन्य हिस्सों के कटा हुआ है. इस बीच पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के प्रभावित इलाक़ों का दौरा करने के बाद संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ राहत अधिकारी यान एगलैन ने बताया कि इस समय जितने हेलिकॉप्टर राहतकार्य में लगे हैं, उससे तीन गुना हेलिकॉप्टरों की ज़रूरत है. एगलैन ने पाकिस्तान में भूकंप प्रभावित इलाक़ों का दौरा कर रहे एक वरिष्ठ संयुक्त राष्ट्र अधिकारी के वहाँ स्थिति गंभीर है और यदि पीड़ित लोगों को जल्द मदद न मिली तो मृतकों की संख्या बढ़ सकती है. आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान में भूंकप से मारे जाने वालों की संख्या 25 हज़ार बताई गई है. प्राकृतिक आपदाओं में संयुक्त राष्ट्र के राहत कार्यों की देखरेख करने वाले प्रभारी अधिकारी यान हेग्लैन पाकिस्तान में स्थिति का जायज़ा ले रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार बीस लाख लोगों की रिहायश का प्रबंध करना है और दस लाख लोगों को तो तत्काल मदद की ज़रूरत है. एगलैन का कहना था, "मैने ऐसी तबाही कभी नहीं देखी. छह दिन हो चुके हैं और हर रोज़ तबाही का आकार बढ़ता ही नज़र आता है." भारत-पाक मतभेद भुलाएँ एगलैन ने भारत और पाकिस्तान से भी आहवान किया है कि वे आपदा की इस घड़ी में मतभेद भुला दें और एकजुट होकर मुश्किल का सामना करें. उनका कहना था, "कश्मीर मुद्दे पर सचमुच पुरानी रंजिश को भूल जाना चाहिए और हर तरफ़ से मदद के लिए खुला न्यौता होना चाहिए." यान एगलैन ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद का दौरा किया है. ग़ौरतलब है कि मुज़फ़्फ़राबाद और उसके नज़दीक बालाकोट सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं. एगलैन ने कहा, "दक्षिण एशिया क्षेत्र में भारत सबसे बड़ा देश है, मुश्किल की घड़ी में संसाधन मुहैया कराना उनका सिर्फ़ अधिकार ही नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारी भी है." एगलैन ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि कोई भी देश इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं का मुक़ाबला करने के लिए प्रभावशाली क़दम नहीं उठा रहा है.
उन्होंने कहा कि ऐसा कम ही देखने में आया है कि इतनी सारी मानवीय राहत एजेंसियाँ मदद के लिए तैयार खड़ी हों. उधर भूकंप के छठे दिन भी पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में मलबे में दबे जीवित लोगों को निकालने की कोशिशें जारी हैं. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल शौक़त सुल्तान ने बीबीसी हिंदी से एक विशेष बातचीत में कहा, "हमने उम्मीद नहीं छोड़ी है, बुधवार को भी हमने कुछ लोगों को मलबे से जीवित निकाला था." जब उनसे पूछा गया कि क्या अब बचाव के बदले राहत कार्यों पर अधिक ध्यान नहीं दिया जा रहा है, इसके जवाब में उन्होंने कहा, "राहत और बचाव दोनों काम एक साथ चलेंगे, अगर हम एक व्यक्ति को भी बचा सकें तो हम पूरी कोशिश करेंगे." नक्शे पर भूकंप प्रभावित इलाक़े-
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