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अब ज़्यादा ध्यान राहत पर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में भूकंप प्रभावित इलाक़ों में मलबे में दबे जीवित लोगों को निकालने की कोशिशें अब लगभग बंद हो गई हैं और सारा ध्यान जीवित बचे लोगों को राहत पहुँचाने पर केंद्रित किया जा रहा है. राहत और बचाव कार्यों में लगे लोगों का कहना है कि मलबे में अब किसी के जीवित बचे होने की बहुत कम उम्मीद है इसलिए अब ज़िंदा बचे लोगों को ज़रूरी सामान मुहैया कराने पर ज़्यादा ध्यान दिया जा रहा है. पाकिस्तान के सूचना मंत्री शेख़ रशीद ने बताया है कि मरने वालों की संख्या कम से कम 25 हज़ार है और लगभग 63 हज़ार लोग घायल हैं. लेकिन संयुक्त राष्ट्र के आपदा प्रबंधन अधिकारी जान एगेलैंड ने आगाह किया है कि इस त्रासदी में मारे गए लोगों की संख्या चालीस हज़ार तक पहुँच सकती है. पाकिस्तान में राहत के कामों के समन्वय की ज़िम्मेदारी संभाल रहे जनरल मोहम्मद फ़ारूक़ ने बीबीसी को बताया है कि कम से कम दो लाख मकान गिर गए हैं और कुल मिलाकर लगभग 25 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. उन्होंने बताया कि ज़्यादातर इलाक़ों में राहत सामग्री पहुँचने लगी है लेकिन जनरल फ़ारूक़ ने स्वीकार किया कि 20 प्रतिशत इलाक़े अब भी ऐसे हैं जहाँ मदद नहीं पहुँचाई जा सकी है. पाकिस्तान में रेड क्रॉस के प्रतिनिधि असरार उल हक़ ने बीबीसी से एक बातचीत में कहा है कि भूकंप से हुए नुक़सान के आकलन का काम पूरा हो गया है और शुक्रवार से रेड क्रॉस एक बड़ा राहत अभियान शुरू कर रहा है. उन्होंने कहा, "आज से हम एक बड़ा राहत अभियान शुरू कर रहे हैं, हर रोज़ पाँच विमानों में भरकर विदेश से राहत सामग्री इस्लामाबाद आएगी जिसे हम हर रोज़ ज़रूरतमंद लोगों में बाँटेंगे." समन्वय मुज़फ़्फ़राबाद में मौजूद बीबीसी के संवाददाता शाहज़ेब जिलानी का कहना है कि शुक्रवार की सुबह होते ही हेलिकॉप्टरों ने राहत सामग्री के साथ उड़ान भरनी शुरू कर दी है.
उन्होंने बताया है कि राहत सामग्री की कमी नहीं दिख रही है लेकिन उसके वितरण में समन्वय की भारी कमी की शिकायत पीड़ित लोग कर रहे हैं, लोगों का कहना है कि सेना को समन्वय का काम अपने हाथ में ले लेना चाहिए. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि राहत सामग्री की छीना-झपटी लगातार जारी है और ज़रूरतमंद कमज़ोर लोग राहत हासिल करने में नाकाम हो रहे हैं. इस बीच मुज़फ़्फ़राबाद में गुरूवार की रात को भी भूकंप के दो झटके महसूस किए गए हैं जिनकी वजह से लोगों में काफ़ी दहशत है. लगभग डेढ़ लाख की आबादी वाले मुज़फ़्फ़राबाद शहर में भूकंप के बाद जीवित बचे ज़्यादातर लोग दूसरी जगहों पर चले गए हैं और शाहज़ेब जिलानी का कहना है वह एक 'भुतहा शहर' बन गया है. तंबुओं की कमी पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में दो लाख घरों के गिर जाने के बाद बड़ी संख्या में तंबुओं की ज़रूरत है लेकिन वहाँ सबसे अधिक कमी इसी की है. ठंड की वजह से लोग परेशान हैं और खुले आसमान के नीचे घायल लोग बेहद तकलीफ़ में रातें काट रहे हैं. पाकिस्तान के सूचना मंत्री का कहना है कि "बड़ी संख्या में तंबू की ज़रूरत है लेकिन उतने तंबू उपलब्ध नहीं हैं, पाकिस्तान के दूतावास विदेशों में भी तंबू जुटाने की कोशिश में लगे हैं, पाकिस्तानी कंपनियों से भी कहा गया है कि वे अधिक से अधिक तंबू तत्काल तैयार करें." नक्शे पर भूकंप प्रभावित इलाक़े-
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