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'भूकंप पीड़ितों को अब भी मदद चाहिए' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दक्षिण एशिया में आए भूकंप को छह महीने बीत चुके हैं और स्वयंसेवी संस्थाओं का कहना है कि लोगों को अब भी मदद की ज़रूरत है. दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार ने अब ध्यान राहत के बजाए पुनर्निर्माण पर केंद्रित कर दिया है. इस भूकंप में 70 हज़ार से अधिक लोगों ने अपनी जानें गवां दी थीं और 20 लाख से अधिक लोग बेघरबार हो गए थे. ब्रिटिश स्वयंसेवी संस्था ऑक्सफ़ैम का भूकंप पीड़ित हज़ारों लोगों को अब भी सहायता की ज़रूरत है. उसका कहना है कि ठंड के कारण जल्दबाज़ी में बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापित कर दिया था और उनकी समस्याएँ अब भी बनी हुईं हैं. पिछली साल आठ अक्टूबर को आए इस भूकंप ने पाकिस्तान में भारी तबाही मचाई थी. प्राथमिकता पुनर्निर्माण लेकिन अब पाकिस्तान सरकार ने राहत के बजाए पुनर्निर्माण पर अपना ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है. बीबीसी संवाददाता निक ब्रायंट का कहना है कि पिछले कुछ सप्ताह में लगभग 40 हज़ार लोग राहत शिविरों से चले गए क्योंकि उन्हें पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक मदद दी गई थी. साथ ही शिविरों को बंद भी किया जा रहा है.
इन राहत शिविरों के आसपास ही नए मकान तैयार हो गए हैं और लोगों को इन मकानों की चाभियाँ सौंपी जा रही हैं. पाकिस्तान सरकार विनाशकारी भूकंप में तबाह हो गए बालाकोट शहर को नई जगह बसाने जा रही है. पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत का यह शहर एक बड़े कब्रिस्तान में तब्दील हो गया था. बालाकोट में हज़ारों लोग मारे गए थे और बड़ी संख्या में लोग बेघरबार हो गए थे. लेकिन अब भूकंप प्रभावित इलाक़ों में दृश्य बदला हुआ है. हेलिकॉप्टर खाने की सामग्री और कपड़े नहीं ले जा रहे हैं, उनमें पुनर्निर्माण की सामग्री और फसल के लिए बीज भरे होते हैं. लेकिन चुनौती अब भी कम नहीं हुई है क्योंकि सर्दियाँ कुछ महीने ही दूर हैं और बड़ी संख्या में मकान तैयार किए जाने बाकी हैं. |
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