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सोमवार, 23 जनवरी, 2006 को 16:08 GMT तक के समाचार
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पाकिस्तान में भूकंप राहत केंद्र पर छापा
माना जा रहा है कि कई ऐसे संगठन इस इलाक़े में काम कर रहे हैं
पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने एक भूकंप राहत कैंप पर इस संदेह में छापा मारा है कि इसे स्थापित करने वाली चैरिटी संस्था के तार प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हुए हैं.

सरहद सूबा के मनशेहरा ज़िले में स्थित इस चैरिटी संस्था अल रहमत के एक निदेशक ने बताया है कि ख़ुफ़िया अधिकारियों ने उनके 15 कर्मचारियों को गिरफ़्तार कर लिया है और राहत सामग्री से भरे चार ट्रकों को भी ले गए हैं.

निदेशक का कहना है कि छापे में 30 हज़ार डॉलर की नक़दी भी अधिकारी ले गए हैं. स्थानीय अधिकारियों ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है लेकिन उन्होंने इस बारे में और विवरण नहीं दिए.

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और अन्य इलाक़ों में अक्तूबर में आए भूकंप के बाद कई धार्मिक संगठनों ने प्रभावित इलाक़ों में राहत कार्य शुरू किया था.

इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता एजाज़ मेहर का कहना है कि किसी भी राहत संस्था के साथ यह इस तरह की पहली कार्रवाई है.

निगरानी

स्थानीय पुलिस प्रमुख अब्दुल मजीद अफ़रीदी ने छापे की पुष्टि की और कहा कि ख़ुफ़िया अधिकारियों ने ये छापे मारे थे. उन्होंने बताया कि छापे के बाद ख़ुफ़िया अधिकारियों ने उन्हें कैंप की निगरानी करने का निर्देश दिया है.

माना जाता है कि कई दुर्गम स्थानों पर ये संस्थाएँ पहले पहुँचीं

वैसे पुलिस अधिकारियों ने ये बताने से इनकार किया है कि कितने लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और क्या बरामद हुए हैं.

पाकिस्तान के गृह मंत्री आफ़ताब शेरपावो टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे. जबकि सूचना मंत्री शेख़ रशीद अहमद ने बीबीसी को बताया कि इस बारे में गृह मंत्रालय ही टिप्पणी करने के लिए अधिकृत है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अक्तूबर में आए भूकंप के बाद कई चरमपंथी संगठन राहत कार्यों में जुट गए थे और माना जाता है कि कई प्रभावित इलाक़ों में तो सबसे पहले यही संगठन पहुँचे थे.

इस इलाक़े में अल राशिद ट्रस्ट और जमात-ए-दावा जैसे संगठन काम कर रहे हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि उनके तार चरमपंथी गुटों से जुड़े हैं.

अमरीका ने राहत कार्यों में ऐसे संगठनों की भागीदारी पर चिंता जताई थी लेकिन उसने सार्वजनिक रूप से इसके लिए पाकिस्तान सरकार पर दबाव नहीं बनाया था.

कुछ जानकारों का मानना है कि ये कार्रवाई कई ऐसे संगठनों के लिए प्रभावित इलाक़ों से अपना बोरिया-बिस्तर बाँधने का संकेत है, जिन पर चरमपंथी संगठनों से जुड़े होने का संदेह व्यक्त किया जा रहा है.

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