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'लोग ग़लत तस्वीर पेश कर रहे हैं' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में नरेश ज्ञानेंद्र की ओर से नियुक्त किए गए नेपाली मंत्रिपरिषद में उप प्रमुख कीर्ति निधि बिष्ट का कहना है कि बाहर के लोग नेपाल की ग़लत तस्वीर पेश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि नेपाल और महाराज ज्ञानेंद्र लोकतंत्र के लिए प्रतिबद्ध है. बीबीसी हिंदी से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि नेपाल नरेश ने बहुदलीय लोकतंत्र और सांवैधानिक राजशाही के प्रति अपनी प्रतिबद्धता हमेशा से ज़ाहिर की है और नेपाल के इस आपातकाल में लोगों को अपनी बात कहने की काफ़ी स्वतंत्रता है. विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों की ओर से मानवीय संकट संबंधी चेतावनियों के बारे में बिस्ट का कहना था कि बाहर के लोगों की ओर से जिस तरह की तस्वीर पेश की जा रही है वो सही नहीं है. उन्होंने कहा, “सूडान या कॉन्गो जैसी जगहों के बारे में ऐसे संकट की चेतावनी तो दी जा सकती है मगर नेपाल में ऐसा कोई संकट नहीं है.” मानवाधिकार उल्लंघन के बारे में बिस्ट का कहना था कि नेपाल में इस तरह का मानवाधिकार उल्लंघन नहीं हो रहा है. उन्होंने इस तरह के उल्लंघन की ज़िम्मेदारी माओवादी विद्रोहियों पर डाली और कहा कि उनकी कार्रवाइयों से कुछ हद तक लोग पीड़ित हैं. बिष्ट के अनुसार, “कभी कभी मुठभेड़ में कोई मारा जाता है तो वो जानबूझकर नहीं होता है, नेपाल इस मामले में बहुत सतर्क है.” 'दुर्व्यवहार की जाँच' लोगों तक नहीं पहुँच पा रही राहत सामग्रियों के बारे में उनका कहना था कि जहाँ कहीं भी सरकार को काम करने की ज़रूरत महसूस हो रही है सरकार वहाँ काम कर रही है. नेपाल में जेनेवा संधि के उल्लंघन के अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के आरोप पर बिष्ट ने कहा, “मेरे ख़्याल से ये ग़लत बात है. सरकार मानवाधिकार संरक्षण के लिए तत्पर है. हमारे यहाँ अगर सेना की ओर से भी कोई ग़लती हुई हो तो हम उसकी जाँच कर रहे हैं.” उन्होंने इस बारे में इराक़ में अमरीकी सैनिकों के दुर्व्यवहार और उसके बाद उन सैनिकों पर हुई कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि उनकी सरकार भी इसी तरह कोई मामला आने पर कार्रवाई कर रही है. लोकतंत्र समर्थकों की गिरफ़्तारी के बारे में उनका कहना था कि देश में आपातकाल तो लगा है मगर लोगों को अपनी बात कहने की स्वतंत्रता है और जिस तरह लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की बात कही जा रही है वो ग़लत है. बिष्ट के अनुसार अगर लोग घरों में नज़रबंद हुए हैं तो लोग रिहा भी किए गए हैं. उनका कहना था, “अख़बारों को पढ़िए तब पता लगेगा कि यहाँ किस तरह आलोचना करने की भी अनुमति है. नेपाल लोगों की स्वतंत्रता का अपहरण करके लोकतंत्र को ख़त्म करना नहीं चाहता.” बिष्ट ने कहा, “महाराजा ने साफ़ शब्दों में कहा है कि वो बहुदलीय लोकतंत्र और सांवैधानिक राजशाही के लिए प्रतिबद्ध हैं.” |
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