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माओवादियों से बात नहीं: नेपाल सरकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल के एक वरिष्ठ मंत्री ने माओवादी विद्रोहियों से बातचीत की संभावना से इनकार किया है. नेपाल नरेश की अध्यक्षता वाले मंत्रिमंडल के उपप्रमुख तुलसी गिरि ने चेतावनी दी है कि माओवादी विद्रोही आत्मसमर्पण करें वरना उन्हें कुचल दिया जाएगा. गिरि ने विद्रोहियों को चरमपंथी करार दिया. गुरुवार को एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि विद्रोहियों के साथ कोई बातचीत नहीं की जाएगी. गिरि ने आरोप लगाया कि विद्रोहियों ने इससे पहले वार्ताओं के दो दौर का फ़ायदा ख़ुद को नए सिरे से संगठित करने में किया. उल्लेखनीय है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान बातचीत का दौ दौर क़ामयाब नहीं हो सका था क्योंकि दोनों बार विद्रोही वार्ताओं से पीछे हट गए. गिरि ने कहा सरकारी सैनिक विद्रोहियों को कुचलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. ब्रिटेन ने सहायता रोकी उन्होंने नरेश ज्ञानेंद्र के सत्ता में आने का विरोध कर रहे दलों के साथ बातचीत का प्रस्ताव किया है. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी नरेश के साथ विपक्षी दलों की सीधी बातचीत की कोई संभावना नहीं है. इस बीच ब्रिटेन सरकार ने घोषणा की है कि नेपाल में लोकतांत्रिक सरकार को हटाए जाने के नरेश के क़दम के विरोध में वह नेपाली पुलिस, जेल सेवाओं और प्रधानमंत्री कार्यालय को सहायता देना करना बंद कर रही है. एक सरकारी बयान में कहा गया है कि नेपाल के इन विभागों को 24 लाख पाउंड की सहायता दी जानी थी इनमें से 11 लाख पाउंड दिए जा चुके हैं, लेकिन शेष राशि नहीं दी जाएगी. |
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