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'नेपाल में मानवीय संकट की स्थिति' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों ने कहा है कि सरकारी सुरक्षा बलों और माओवादी विद्रोहियों के बीच संघर्ष का ग़रीब लोगों पर बुरा असर पड़ा है और देश में मानवीय संकट के हालात पैदा हो रहे हैं. इन एजेंसियों ने कहा है कि इस संघर्ष की वजह से बहुत से नागरिकों और शरणार्थियों को बेसहारा कर दिया है और उन्हें सहायता सामग्री और दवाइयाँ नहीं मिल पा रही हैं. संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और पश्चिमी देशों की नौ एजेंसियों ने एक संयुक्त बयान में नेपाल में दोनों पक्षों से अनुरोध किया है कि वे महत्वपूर्ण सहायता सामग्री के आवागमन में बाधा नहीं पहुँचाएँ और मानवाधिकारों का सम्मान करें. बयान के अनुसार इस संघर्ष का असर सबसे ज़्यादा बच्चों पर पड़ रहा है और बहुत से बच्चों को में विटामिनों की कमी है और उन्हें उपयुक्त दवाइयाँ भी नहीं मिल पा रही हैं. ग़ौरतलब है कि पिछले महीने नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने देश की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को बर्ख़ास्त करके सत्ता अपने हाथों में ले ली थी और आपातस्थिति लागू कर दी थी. एजेंसियों के बयान में कहा गया है कि इस तरह की ख़बरें भी मिली हैं कि हाल के दिनों में बहुत सी महिलाओं की मौत बच्चों को जन्म देते वक़्त हो गई क्योंकि उन्होंने सही वक़्त पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी. नेपाल के उत्तरी हिस्से में क़रीब एक लाख भूटानी शरणार्थियों की स्थिति के बारे में भी चिंता जताई गई है.
ये शरणार्थी एजेंसियों की राहत और सहायता पर ही निर्भर हैं लेकिन उन तक सहायता नियमित रूप से नहीं पहुँच पा रही है. काठमांडू में बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैवीलैंड का कहना है कि राहत एजेंसियों का यह वक्तव्य संक्षिप्त लेकिन बहुत तीखा है जिसमें सरकारी सुरक्षा बलों और माओवादी विद्रोहियों दोनों को ही यह याद दिलाया गया है कि उन्हें नागरिकों की हिफ़ाज़त और सभी ज़रूरतमंदों तक राहत सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि यह एक ऐसा संघर्ष है जिसमें आम नागरिक प्रभावित हो रहे हैं और अक्सर जेनेवा संधि का उल्लंघन किया जाता है. बातचीत उधर नेपाल के एक वरिष्ठ मंत्रि तुलसी गिरी ने माओवादी विद्रोहियों के साथ किसी बातचीत से इनकार किया है लेकिन कहा है कि सरकार मुख्य धारा के राजनीतिक दलों के साथ बातचीत के लिए तैयार है. तुलसी गिरी ने कहा कि माओवादी विद्रोही या तो आत्मसमर्पण करें या फिर सख़्त कार्रवाई के लिए तैयार रहें. |
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