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ओबामा की जीत ज़ोरदार अभियान का नतीजा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दो साल पहले तक अमरीका की राजनीति में ओबामा कोई बहुत चमकदार हस्ती नहीं थे, राष्ट्रपति पद के दावेदार के रूप में उन्हें तब शायद ही किसी ने देखा हो. एक शानदार और सुनियोजित अभियान के ज़रिए इलिनॉय के सीनेटर से वे दुनिया के सबसे शक्तिशाली पद पर पहुँच गए हैं. उनका अभियान इतना संगठित था कि आने वाले दिनों में उन्हें हराने की मंशा रखने वाले को उनसे पहले काफ़ी कुछ सीखना होगा. यहाँ तक कि रिपब्लिकन पार्टी के रणनीतिकार भी मानते हैं कि ओबामा का चुनाव अभियान बिल्कुल 'परफ़ेक्ट' था. ओबामा की सबसे बड़ी शुरूआती सफलता थी बड़े पैमाने पर आम लोगों से चुनाव लड़ने के लिए चंदा इकट्ठा करना, जब उन्हें पता चल गया कि उन्हें पैसा देने वालों की कमी नहीं है तो उन्होंने सरकारी ख़ज़ाने से पैसा लेने से इनकार कर दिया क्योंकि उस धनराशि की एक सीमा थी. ओबामा ने इस चुनाव में दिल खोलकर ख़र्च किया क्योंकि लोगों ने उन्हें दिल खोलकर पैसे दिए, मशहूर टॉक शो एंकर ओपरा विनफ्री से लेकर आम अमरीकियों ने इंटरनेट के ज़रिए उन्हें लाखों डॉलर भेंट किए. उनकी मदद करने वालों की भी कमी नहीं थी, फेसबुक की शुरूआत करने वाले क्रिस ह्यूज़ ने उनके लिए चंदा जुटाने के लिए एक बेहतरीन वेबसाइट शुरू की, इस साइट के ज़रिए उन्होंने तीस लाख डॉलर जुटाए. जॉन मैकेन के मुक़ाबले ओबामा के पास चार गुना अधिक संसाधन थे, उन्होंने ढेर सारे लोगों नौकरी पर रखा था और देश भर में हज़ारों कार्यकर्ता पूरे उत्साह से जुटे हुए थे.
हर प्रांत में उन्होंने बहुत मेहनत से चंदा देने वालों और वोटरों का डेटाबेस तैयार किया था, ओबामा की वेबसाइट पर जाने वालों का खुले दिल से स्वागत किया गया और उन्हें अभियान से जोड़ने की कोशिश की गई, उनसे चंदा देने, कार्यकर्ता बनने या किसी भी तरह से मदद करने को कहा गया. अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव में टीवी विज्ञापनों की ख़ासी भूमिका होती है जो कि ख़ासा महँगा सौदा है लेकिन ओबामा के पास पैसे की कोई कमी नहीं था, उन्होंने जमकर टीवी के ज़रिए प्रचार किया. कुछ राज्यों में जहाँ जीतना अहम था वहाँ ओबामा के कार्यकर्ताओं और अभियान के मैनेजरों ने अपनी सारी ताक़त झोंक दी. ओबामा ने आक्रामक तरीक़े से रिपब्लिक गढ़ समझे जाने वाले राज्यों में घुसकर ज़ोरदार प्रचार किया, उन्होंने मैकेन को मजबूर कर दिया कि वे अपने सीमित संसाधन को चारों तरफ़ बिखेरें और 'स्विंग स्टेट्स'पर ज्यादा ध्यान न दे पाएँ. करिश्मा यह सब इसीलिए संभव हो पाया क्योंकि ओबामा एक ज़ोरदार वक्ता और करिश्माई व्यक्तित्व के मालिक हैं. बिल क्लिंटन की ही तरह वे भारी भीड़ से बहुत आसानी से संवाद कर सकते हैं.
उनकी इमेज अमरीका के हिसाब से बिल्कुल सही थी, अपनी मेहनत से आगे बढ़ने वाला एक पारिवारिक आदमी जिसके पास एक घर, एक गाड़ी और एक सुखी परिवार है. जबकि मैकेन ने अपनी उस पत्नी को तलाक दे दिया जिसने वियतनाम की लड़ाई के दौरान वर्षों उनका इंतज़ार किया, उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि उन्हें याद नहीं है कि उनके कितने मकान हैं. उन्हें काले वोटरों का समर्थन ज़रूर मिला लेकिन उन्होंने एशियाई, यहूदी, युवा, महिला यानी समाज के हर तबके में अपनी ज़ोरदार पैठ बनाई. ओबामा का संदेश बहुत साफ़ था, 'देश ग़लत दिशा में जा रहा है, बदलाव की ज़रूरत है,' यह ऐसा संदेश था जिसे समझने के लिए किसी अमरीका को ज्यादा सिर खपाने की ज़रूरत नहीं थी, ख़ास तौर पर आर्थिक मोर्चे पर. जहाँ मैकेन बहुत चाहकर भी ख़ुद को बुश की छाया से आज़ाद नहीं करा सके, वहीं देश की ज्यादातर जनता को लगा कि बुश के दौर की ग़लतियों को ओबामा ही ठीक कर सकते हैं. आर्थिक मोर्चे पर रिपब्लिकन नाकामी का ओबामा ने जमकर फायदा उठाया, उन्होंने ग़रीबों के हक़ में समृद्धि फैलाने की बात कही जिसका मैकेन ने मज़ाक उड़ाया, मैकेन ने आर्थिक समस्या को सुलझाने के जो उपाय सुझाए वे अमीरों को लाभ पहुँचाने वाले समझे गए, यहीं ओबामा ने मैदान मार लिया क्योंकि 60 प्रतिशत से अधिक अमरीकियों के लिए अर्थव्यवस्था की हालत ही सबसे बड़ा मुद्दा था. मैकेन का पूर्व सैनिक होना, वैदेशिक मामलों का ढेर सारा अनुभव काम नहीं आया. ओबामा पर अनुभवहीन होने के आरोप लगे लेकिन उन्होंने बाइडन जैसे अनुभवी व्यक्ति को उप राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाकर यह कमी पूरी कर ली. |
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