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बुधवार, 05 नवंबर, 2008 को 10:15 GMT तक के समाचार
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क्या अमरीका की छवि बदलेगी?

बराक ओबामा
बराम ओबामा से लोगों की काफ़ी उम्मीदें हैं
वर्ष 1960 में जेएफ़ कैनेडी के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद दुनिया में अमरीका की साख में ज़बरदस्त बदलाव आया.

अमरीका ख़ुद को हमेशा युवा और ऊर्जावान देश मानता रहा है. हालांकि ज़्यादातर समय यह दिखावे से ज़्यादा कुछ नहीं होता, लेकिन कभी-कभी ऐसा समय आया है जब यह दिखावा पूरी तरह सच लगता है.

अमरीका के राष्ट्रपति के रुप में बराक ओबामा की जीत एक ऐसा ही सच है.

जार्ज डब्लू बुश के शासन के अंतिम दौर में बाहरी दुनिया में अमरीका की छवि जितनी धूमिल हुई उतनी किसी भी दौर में नहीं हुई.

हाल ही में मैंने राष्ट्रपति क्लिंटन के शासन के दौरान विदेश मंत्री रही मैडलिन ऑलब्राइट से पूछा कि क्या वो बता सकती हैं कि इतिहास के किसी और दौर में लोगों ने अमरीका को इतना नापसंद किया हो.

उनका कहना था, "मेरे जीवन के दौरान तो कभी नहीं."

दुनिया भर में हुए सर्वेक्षण अमरीका की लोकप्रियता में कमी दिखाते हैं, लेकिन एक युवा, हँसमुख और अश्वेत व्यक्ति के अमरीका के राष्ट्रपति बनने की संभावना को लोगों ने हाथों-हाथ लिया.

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने पिछली गर्मियों में 22 देशों में एक सर्वेक्षण किया था जिसमें 80 प्रतिशत लोगों ने बराक ओबामा को पसंद किया था.

सर्वेक्षण में आधे से ज़्यादा लोगों का कहना था कि यदि बराक ओबामा चुनाव जीतते हैं तो उनके मन में अमरीका की जो छवि है वह पूरी तरह से बदल जाएगी.

पिछले आठ वर्षों से दुनिया भर में लोगों ने बुश के शासन करने के रंग-ढंग को 'अहंकार' कह कर बार-बार नवाज़ा है.

तिरस्कार का भाव

वाशिंगटन में लोगों के स्वर में उच्चता का बोध तिरस्कार की हद तक दिखता है.

आप डॉनाल्ड रम्सफ़ेल्ड, पॉल वोल्फ़ोविट्ज या पॉल ब्रेमर को याद कीजिए. ये सब लोग इराक़ पर अमरीका के आधिपत्य की नीतियों से जुड़े थे. इन लोगों ने पूरी दुनिया की सलाह नहीं मानी.

 मुझे लगता है कि अमरीकी विदेश नीति के इतिहास में इराक़ सबसे विनाशकारी नीति के रुप मे याद किया जाएगा, वियतनाम से भी बुरा
मैडलिन ऑलब्राइट

अमरीका ने क्यों इराक़ पर आक्रमण किया? इनमें से एक ने कहा, "क्योंकि हम अमरीका हैं, और ऐसा कर सकते हैं."

अमरीका से बाहर ज़्यादातर लोग मैडलिन ऑलब्राइट की इस बात से शायद सहमत होंगे, "मुझे लगता है कि अमरीकी विदेश नीति के इतिहास में इराक़ सबसे विनाशकारी नीति के रुप मे याद किया जाएगा, वियतनाम से भी बुरा."

वर्ष 2003 में इराक़ पर अमरीकी आक्रमण के समय बराक ओबामा ने ज़ोरदार ढंग से सार्वजनिक तौर पर इसकी निंदा की थी. उस समय कई अमरीकी नेता लोगों से मुँह छिपाते फिर रहे थे.

गारंटी नहीं

यह तथ्य कि वे अमरीका के राष्ट्रपति होंगे, उनकी इस बात का पुरस्कार है. जो लोग ये मानते रहे हैं कि इराक़ में युद्ध ग़लत था वे महसूस करेंगे कि अमरीका ने एक नया रास्ता चुना है.

ओबामा और मैक्केन
ओबामा के चुने जाने से दुनिया के सामने अमरीका की एक अलग छवि जाएगी

अमरीका अब वैसी शक्ति नहीं रहा जैसा कि वह पहले था. यह समझे बिना राष्ट्रपति बुश ने इसे साबित कर दिखाया.

अमरीका दुनिया को नेतृत्व अब भी दे सकता है लेकिन अपनी मर्जी के मुताबिक उसे चला नहीं सकता.

बराक ओबामा अच्छी तरह इससे वाकिफ़ हैं. एक अफ़्रीकी-अमरीकी होने की वजह से उनकी पृष्ठभूमि ऐसे लोगों की नहीं रही है जो पूरी दुनिया में मनमानी को अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हों.

हालांकि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वे एक सफल राष्ट्रपति होंगे. वियतनाम से युद्ध के बाद जिमी कार्टर ने स्थिति को सही तरीक़े से समझा था और उन्होंने दुनिया को अपनी मर्जी से चलाने से इनकार कर दिया था.

कार्टर को ज़्यादातर अमरीकी उन्हें एक नाकाम राष्ट्रपति के रुप में देखते हैं.

ओबामा की जीत के बाद पूरी दुनिया में जैसी खुशी की लहर दिख रही है उससे तो ज़रूर लगता है कि अमरीका की छवि बदलने वाली है.

अभियान के देसी अगुआ
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