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बुश ने मंज़ूरी का स्वागत किया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने भारत के साथ परमाणु समझौते को प्रतिनिधि सभा की मंज़ूरी का स्वागत किया है. भारत ने भी इसे महत्वपूर्ण क़दम बताया है. हालाँकि भारत में वामपंथी दलों ने एक बार फिर परमाणु समझौते की आलोचना की है. अमरीकी संसद के निचले सदन यानी प्रतिनिधि सभा ने भारत-अमरीका परमाणु समझौते को 117 के मुक़ाबले 298 मतों से पारित कर दिया है. अब इसे उच्च सदन यानी सीनेट की मंज़ूरी के लिए भेजा जाएगा और संभावना है कि अगले हफ़्ते इस पर मत विभाजन हो. राष्ट्रपति बुश ने इसका स्वागत करते हुए कहा, "इस क़ानून का प्रतिनिधि सभा से पारित होना भारत-अमरीका रिश्ते को नया आयाम देने में बड़ा क़दम है." उन्होंने कहा, "मैं सीनेट से अपील करता हूँ कि अक्तूबर में सत्रावसान से पहले जल्दी से इस महत्वपूर्ण समझौते को पारित करे." 'सीनेट में दिक्क़त नहीं' भारत-अमरीका राजनीतिक कार्यसमिति के संजय पुरी ने उम्मीद जताई है कि एक सांसद की आपत्तियों के बावजूद सीनेट से भी यह समझौता पारित हो जाएगा. उन्होंने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा, "सीनेट आम तौर कुछ गंभीर किस्म के क़ानूनों में ही अड़ंगा डालती है. समझौते के समर्थक सांसद इन आपत्तियों को दूर कर देंगे." भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने वाशिंगटन में पत्रकारों से कहा कि समझौता अंतिम रुप लेने से महज एक क़दम दूर है. उन्होंने उम्मीद जताई एक-दो दिन में ही सीनेट से भी यह पारित हो जाएगा. अमरीका में भारत के राजदूत रोनेन सेन का कहना था, "यह समझौता न केवल भारत और अमरीका बल्कि पूरी दुनिया के लिए बेहतर है." इस बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के नेता डी राजा ने दोहराया कि परमाणु समझौता भारत के हित में नहीं है. उन्होंने दिल्ली में एक टेलीविज़न चैनल से कहा, "यह भले ही अमरीकी संसद से पारित हो गया हो लेकिन प्रधानमंत्री भारतीय संसद के प्रति उत्तरदायी हैं. उन्हें जवाब देना होगा." उन्होंन कहा कि वामपंथी दलों ने इस क़रार को लेकर जो आपत्तियाँ जताई हैं, वो सही साबित होंगी. |
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