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शुक्रवार, 19 सितंबर, 2008 को 03:36 GMT तक के समाचार
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परमाणु समझौताः कुछ क़दम और...
अमरीकी संसद
सांसदों ने जहाँ इस समझौते की प्रशंसा की वहीं अपनी चिंताएं भी सामने रखीं
भारत-अमरीका परमाणु क़रार के मसौदे पर अब अमरीकी सीनेट में मतदान की प्रक्रिया ही बाकी है और दोनों देशों के बीच परमाणु क़रार मूर्त रूप लेने के लिए तैयार है.

गुरुवार को अमरीकी सीनेट की अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति के सामने इस क़रार के मसौदे को रखा गया जहाँ समिति के सदस्यों और सांसदों ने इसपर बातचीत की.

सदस्यों ने जहाँ इस समझौते को दोनों पक्षों के हित में बताया वहीं इस क़रार को लेकर अपनी चिंताएँ और जिज्ञासाएं भी व्यक्त कीं.

इस अहम बैठक में अमरीकी विदेश विभाग के सहायक सचिव विलियम्स बर्न्स और हथियारों के फैलाव पर रोक से संबंधित अमरीकी अधिकारी जॉन रूड ने समझौते के बारे में सरकार का पक्ष सामने रखा.

बैठक के दौरान कुछ सीनेटरों ने यह भी जानना चाहा कि क्या अमरीका की ओर से भारत को कोई ऐसी छूट दी गई है जिसके तहत भारत परमाणु परीक्षण भी कर सकता है और उसके बावजूद समझौता भी क़ायम रहेगा.

यह भी पूछा गया कि क्या भारत को बिना रुकावट परमाणु ईधन आपूर्ति की गारंटी दी गई है.

क़रार की कीमत पर परीक्षण

मनमोहन सिंह और जॉर्ज बुश
भारत और अमरीका इस क़रार को जल्द ही मूर्तरूप देने की कोशिश में हैं

इन सवालों के जवाब में अमरीकी अधिकारी जॉन रूड ने सीनेटरों को बताया कि ईधन की बिना रुकावट गारंटी अमरीका ने नहीं ली है और अगर भारत परमाणु परीक्षण करता है तो क़रार टूट जाएगा.

अमरीकी संसद के क़ानून के मुताबिक समझौते के मसौदे को 30 दिनों तक अमरीकी संसद में बहस के लिए रखा जाना चाहिए इसके बाद ही इसे पारित किया जा सकता है.

पर ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि अमरीकी संसद में इसे 26 सितंबर तक पारित करा लिया जाएगा. कम से कम बुश प्रशासन की कोशिश तो यही है.

इसकी वजह भी साफ़ है. अगर संसद के वर्तमान सत्र में इसपर मतदान होकर इसे पारित नहीं कराया गया तो फिर अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव संपन्न होने तक की अवधि के लिए इस क़रार पर मतदान संभव नहीं हो सकेगा.

इसके बाद संसद में इस समझौते पर मतदान की स्थिति बनेगी दिसंबर में. पर जानकार मानते हैं कि दिसंबर में राष्ट्रपति चुनाव के बाद संसद की बैठक की संभावना कम ही है.

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