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समझौता अमरीकी संसद को भेजा गया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने भारत-अमरीका परमाणु समझौते के दस्तावेज़ अमरीकी संसद यानि कांग्रेस के पास अंतिम मंज़ूरी के लिए भेज दिए हैं. व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा कि अमरीका-भारत परमाणु समझौते के दस्तावेज़ और अन्य ज़रूरी काग़जात बुधवार को सांसदों को भेज दिए हैं. उम्मीद जताई गई है कि अमरीकी सांसद इस पर ज़रूरी कार्रवाई करने के बाद सितंबर तक वापस भेज देंगे. उल्लेखनीय है कि बुश प्रशासन को अमरीकी सांसदों को 26 सितंबर को सत्रावसान से पहले इस समझौते को पारित करने के लिए राजी करना होगा. अमूमन ऐसे समझौतों को पारित करने के लिए 30 दिनों का सत्र बुलाए जाने की ज़रूरत होती है. लेकिन 26 सितंबर को सत्रावसान हो रहा है. ग़ौरतलब है कि भारत-अमरीका परमाणु समझौते को परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह की मंज़ूरी मिलने के बाद अब अमरीकी कांग्रेस से भारत-अमरीका परमाणु समझौते को अंतिम मंज़ूरी मिलनी बाकी है. अमरीकी कांग्रेस के समक्ष परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों की मंज़ूरी और भारत-अमरीका के बीच हुए 123 समझौते को रखा जाएगा जिसे उन्हें हरी झंडी देनी होगी, उसके बाद ही ये समझौता प्रभावी हो पाएगा. जॉर्जिया विश्वविद्यालय में एशिया कार्यक्रम के निदेशक अनुपम श्रीवास्तव का मानना है कि इस बात की पूरी संभावना है कि इसी सत्र में इसे पारित कर दिया जाए क्योंकि रिपब्लिकन पूरी तरह से इसके साथ हैं और डेमोक्रेट भी भारत के साथ इस समझौते को तोड़ना नहीं चाहेंगे. उनका मानना है कि अगर डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य इसे रोकने की कोशिश भी करेंगे तो उन्हें अपने ही उद्योग जगत के दबाव का सामना करना पड़ेगा. उद्योग जगत का तर्क होगा कि भारत के लिए परमाणु ईधन का रास्ता साफ़ तो करवाया अमरीका ने पर इसका लाभ रूस और फ्रांस जैसे देशों को मिल रहा है, अमरीका को नहीं. |
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