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परमाणु समझौते पर विपक्ष ने उठाए सवाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत अमरीका परमाणु समझौते को लेकर एक अमरीकी अखबार में छपी एक ख़बर के बाद भारत में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार देर रात आपात बैठक बुलाई थी. ख़बरें हैं कि परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अनिल काकोडकर को भी बातचीत के लिए इस बैठक में बुलाया गया था. इधर गुरुवार से न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) की दोदिवसीय बैठक शुरू होनेवाली है. उल्लेखनीय है कि वॉशिंगटन पोस्ट अख़बार ने बुश प्रशासन की ओर से वहाँ की संसद की विदेशी मामलों की समिति के सदस्यों को लिखा एक पत्र छापा है जिसमें कहा गया है कि यदि भारत परमाणु परीक्षण करता है तो उसे परमाणु ईंधन की आपूर्ति रोक दी जाएगी. भारत सरकार अब तक कहती आई है कि अमरीका के साथ समझौते का भारत के परमाणु परीक्षण करने की स्वतंत्रता पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इस ख़बर के बाद पत्रकारों से बातचीत में भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने सफ़ाई दी,'' हमें द्विपक्षीय समझौते की शर्तों से मतलब है जो अमरीका के साथ हुआ है.'' उनका कहना था,'' जहाँ तक परीक्षण की बात है तो हमारी स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है. हम परीक्षण के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं और ये बात 18 जुलाई, 2005 को भारत अमरीका के साझा बयान से साफ़ हो जाती है.'' भारत में अमरीका के राजदूत डेविड मल्फर्ड ने भी एक बयान जारी कर कहा है कि इस पत्र में कोई नई शर्तें नहीं है और इसमें कोई ऐसी बातें नहीं हैं जो भारत सरकार को पता न हों. विपक्ष की कड़ी प्रतिक्रिया सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव डी राजा ने इसको लेकर मनमोहन सरकार पर निशाना साधा है. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि हमारी कही बातें सही साबित हो रही हैं कि अमरीकी सरकार ने भारत को गुमराह किया है. सीपीएम ने कहा है कि वाम दलों ने सरकार को पहले ही चेतावनी दी थी जो सच साबित हुई है. सीपीएम नेता बृंदा कारत का कहना था कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में जो दावे किए थे, सब झूठे साबित हो गए हैं. भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया है. भाजपा नेता यशवंत सिन्हा का कहना था कि विदेशी मामलों से संबंधित समिति को बुश प्रशासन की ओर से भेजा गया पत्र कोई मामूली बात नहीं है. इस पत्र से अमरीकी सरकार की नीति झलकती है. उनका कहना था कि सरकार ने दावा किया था कि भारत के पास परीक्षण का अधिकार बना रहेगा जबकि बुश प्रशासन के पत्र से साफ़ हो गया है कि भारत के परमाणु परीक्षण करते ही सभी प्रकार का सहयोग रोक दिया जाएगा. |
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