|
अमरीका परमाणु समझौते के लिए अडिग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता टोनी स्नॉ ने कहा है कि उनका देश भारत के साथ असैनिक परमाणु समझौते के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने पत्रकारों से कहा कि 'कुछ तकनीकी मुद्दों' के कारण समझौते को लागू करने में देरी हो रही है. इस बीच नई दिल्ली में अमरीकी विदेश उपमंत्री निकोलस बर्न्स शुक्रवार को परमाणु समझौते पर ही भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत आगे बढ़ाएंगे. उन्होंने गुरुवार को विदेश सचिव शिवशंकर मेनन से मुलाक़ात की थी और पत्रकारों से कहा था कि वो बातचीत की प्रगति से आशान्वित हैं. समयसीमा नहीं टोनी स्नॉ का कहना था, "मैं आपको कोई अंतिम समयसीमा नहीं बता सकता लेकिन सरकार समझौते के लिए प्रतिबद्ध है." उन्होंने माना कि बातचीत के दौरान थोड़ी बुहत बाधा आना स्वाभाविक है. स्नॉ ने कहा, "कभी भी जब इतना बड़ा और महत्वाकांक्षी समझौता करते हैं तो कुछ तकनीकी मुद्दों पर फंसते हैं जो आगे बढ़ने की गति को धीमा कर देता है." निकोलस बर्न्स समझौते के कुछ प्रस्तावों पर मतभेद सुलझाने के लिए ही तीन दिन की यात्रा पर भारत आए हुए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें परमाणु समझौते पर बातचीत23 मई, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु करार पर भारत को उम्मीद18 मई, 2007 | भारत और पड़ोस 'परमाणु समझौते पर उल्लेखनीय प्रगति'02 मई, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु सौदे पर भारत के तेवर कड़े18 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस 'परमाणु परीक्षणों पर रोक मंज़ूर नहीं'10 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु करार पर बुश-मनमोहन की चर्चा21 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस परमाणु सहमति भारत के हित में?22 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस 'नई शर्तें स्वीकार नहीं करेगा भारत'26 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||