|
परमाणु सौदे पर भारत के तेवर कड़े | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और अमरीका के बीच हुए परमाणु समझौते की अगली कड़ी शुरु होने से पहले भारत ने कड़ा रवैया अपनाना शुरु कर दिया है. इस समझौते को लागू करने के लिए दोनों देशों के बीच 123 ( वन टू थ्री )समझौता होना है और इसके लिए वार्ताएं शुरु होने वाली हैं. इन वार्ताओं से पहले भारत ने साफ किया है कि रिएक्टरों में बचे हुए ईंधन के उपयोग के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता और भारत यह अधिकार किसी को नहीं दे सकता. परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रमुख अनिल काकोदकर ने इस संबंध में बयान देते हुए कहा ' हम बचे हुए ईंधन के दोबारा प्रयोग का अधिकार अपने पास बनाए रखना चाहते हैं. यह ऐसा अधिकार है जिस पर कोई बातचीत कोई समझौता नहीं किया जा सकता.' परमाणु समझौते के तहत भारत रिएक्टरों में इस्तेमाल के बाद बचे हुए ईंधन का उपयोग नहीं कर सकता है और इस समझौते को अमरीका के दोनों सदनों में पारित किया जा चुका है. इस समझौते में प्रमुख भूमिका निभाने वाले काकोदकर का कहना है कि ये सभी बातें 123 समझौते से पहले साफ होनी चाहिए. उनका कहना है कि 18 जुलाई 2005 में दोनों देशों के संयुक्त बयान और मार्च 2006 में भारतीय परमाणु योजना के तहत भारत ने रुख तय किया है लेकिन अमरीका में इससे जुड़ा जो क़ानून ( हाइड एक्ट) पारित हुआ है वह इससे अलग है. काकोदकर का कहना था कि अगर दोनों देशों के बीच 123 समझौता नहीं होता है तो भारत के पास अन्य रास्ते हैं लेकिन परमाणु समझौते के लिए यह एक बड़ा झटका होगा. समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा ' हम चाहते हैं कि जुलाई 2005 के संयुक्त बयान के ढांचे में बातचीत हो और हाइड एक्ट के बाद भारत की चिंताओं को समझा जाए.' हाइड एक्ट के तहत भारत आने वाले समय में कोई परमाणु परीक्षण नहीं कर सकेगा. इस बारे में काकोदकर का कहना था कि भारत ने परीक्षणों पर अपनी तरफ से एकतरफा प्रतिबंध लगाया है लेकिन किसी अन्य देश के साथ क़ानूनी बाध्यता में नहीं बंधा जा सकता. हालांकि उन्होंने साफ किया कि प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया है कि हाडड एक्ट के बाद कुछ वैज्ञानिकों ने जो चिंताएं व्यक्त की हैं उन पर विचार किया जाएगा. | इससे जुड़ी ख़बरें भाजपा ने परमाणु संधि का विरोध किया10 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस वामपंथी भी परमाणु संधि से ख़ुश नहीं11 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बुश ने परमाणु विधेयक का स्वागत किया11 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'सामरिक कार्यक्रम में दख़ल नहीं होगा'12 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'सामरिक कार्यक्रम की निगरानी नहीं'18 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'परमाणु परीक्षण के विकल्प खुले हैं'19 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'परमाणु परीक्षणों पर रोक मंज़ूर नहीं'10 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस भारत के परमाणु कार्यक्रम का सफ़र05 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||