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बुश ने परमाणु विधेयक का स्वागत किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने भारत-अमरीका परमाणु समझौते को अमरीकी संसद की मंज़ूरी मिलने का स्वागत किया है. संसद से पारित होने के बाद अब इस विधेयक को राष्ट्रपति बुश के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा. भारत में विपक्ष के साथ-साथ कुछ भारतीय वैज्ञानिकों ने भी भारत-अमरीका परमाणु नीति पर सवाल उठाए हैं. उधर पश्चिमी देशों में इसके आलोचकों का कहना है कि इससे परमाणु अप्रसार के प्रयासों को धक्का लगेगा. इस समझौते के तहत भारत को असैनिक कार्यों के लिए, विशेष तौर पर अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पश्चिमी देशों से परमाणु ईंधन और तकनीक ले पाएगा. लेकिन इसी के तहत भारत को अपने असैनिक परमाणु केंद्रो को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निरीक्षण के लिए खोलना होगा. राष्ट्रपति बुश ने एक बयान में कहा, "इस विधेयक से अमरीका और भारत के बीच रणनीतिक रिश्ता मज़बूत होगा और दोनो देशों को इसका फ़ायदा होगा." उनका कहना था, "मुझे ख़ुशी है कि दोनो देशों को आपस में काम करने का और मौक़ा मिलेगा और ऊर्जा आपूर्ति ऐसे तरीकों से हो पाएगी कि वायुमंडल में प्रदूषण न फैले, ग्रीन हाउस गैसें न बढ़ें, विकास हो पाए, अप्रसार में मदद मिले और व्यापारिक हितों की रक्षा हो." ग़ौरतलब है कि भारत के परमाणु हथियारों के केंद्र निरीक्षण के लिए खोले नहीं जा रहे. पर्यवेक्षकों का कहना है कि भारत इस समझौते को भारत-अमरीका रिश्तों में एक ऐतिहासिक घड़ी मानता है. | इससे जुड़ी ख़बरें भारत-परमाणु समझौता अख़बारों में छाया09 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना समझौते को अमरीकी संसद की मंज़ूरी09 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना भारत-अमरीका परमाणु समझौता मंज़ूर09 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना परमाणु समझौते के मसौदे पर सहमति08 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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