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मंगलवार, 19 दिसंबर, 2006 को 16:09 GMT तक के समाचार
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'परमाणु परीक्षण के विकल्प खुले हैं'
प्रणव मुख़र्जी
रक्षा मंत्री ने कहा है कि समझौते से परमाणु पदार्थों के उत्पादन पर नियंत्रण नहीं होगा
विदेश मंत्री प्रणव मुख़र्जी ने कहा है कि अगर ज़रूरत पड़ी तो भविष्य में भारत के लिए परमाणु परीक्षण का विकल्प खुला हुआ है.

संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में अमरीका के साथ परमाणु करार पर हुई बहस का जवाब देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इस समझौते से परमाणु पदार्थों के उत्पादन पर रोक नहीं लगेगी.

उधर विपक्षी दलों का कहना था कि अमरीकी संसद से पारित विधेयक को उसी शक्ल में स्वीकार करने का मतलब होगा भारत के राष्ट्रीय हितों से समझौता करना.

इस पर प्रणव मुख़र्जी ने कहा कि अमरीकी संसद ने परस्पर सहमति से हटकर जो नई बातें विधेयक में शामिल की है, उस पर बुश प्रशासन से बातचीत की जाएगी.

आश्वासन

लगभग छह घंटे चली बहस के दौरान उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि इस मामले पर संदेह का कोई कारण नहीं होना चाहिए. यह असैनिक परमाणु समझौता है न कि कोई हथियार नियंत्रण समझौता."

 ज़रूर पड़ने पर परमाणु परीक्षण का विकल्प हमने खुला रखा है. अगर अंतरराष्ट्रीय परिस्थिति कुछ इस तरह की बनी तो हम परीक्षण करेंगे. हम इस विकल्प को सदा के लिए बंद नहीं कर सकते
प्रणव मुख़र्जी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की उपस्थिति में विदेश मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि भारत पिछले वर्ष 18 जुलाई के साझा बयान और इस वर्ष दो मार्च को हुए समझौते से अलग कोई शर्त स्वीकार नहीं करेगा.

परमाणु परीक्षण पर नियंत्रण से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "हम किसी अतिरिक्त दबाव में नहीं आ रहे हैं. हमने ख़ुद ही परीक्षण नहीं करने का फ़ैसला किया है और हम उसी पर कायम हैं."

उनका कहना था, "ज़रूर पड़ने पर परमाणु परीक्षण का विकल्प हमने खुला रखा है. अगर अंतरराष्ट्रीय परिस्थिति कुछ इस तरह की बनी तो हम परीक्षण करेंगे. हम इस विकल्प को सदा के लिए बंद नहीं कर सकते."

 हमारा सामरिक कार्यक्रम हमारे अपने फैसलों के मुताबिक होगा. इसमें किसी अन्य देश की दखलंदाज़ी नहीं होगी
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

इसस पहले सोमवार को लोकसभा में इसी मुद्दे पर हुई बहस के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्पष्ट किया था कि भारत के सामरिक कार्यक्रम की अंतरराष्ट्रीय निगरानी नहीं होगी और यह 'अपनी ज़रूरतों पर आधारित होगा'.

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के सामरिक कार्यक्रम का क्या दायरा है, इस बारे में न तो अमरीका और न ही किसी अन्य देश के साथ कोई बातचीत हुई है.

डॉ सिंह ने समझौते से जुड़ी आशंकाओं को दूर करने की कोशिश करते हुए कहा, "हमारा सामरिक कार्यक्रम हमारे अपने फैसलों के मुताबिक होगा. इसमें किसी अन्य देश की दखलंदाज़ी नहीं होगी."

अमरीकी संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने सोमवार को ही भारत के साथ परमाणु समझौते से संबंधित विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए.

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