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परमाणु करार पर भारत को उम्मीद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उम्मीद जताई है कि असैनिक परमाणु समझौते को लेकर अमरीका के साथ इस महीने के अंत में होने वाली अंतिम दौर की बातचीत से सार्थक नतीजे निकलेंगे. कुछ मसलों पर दोनों देशों के कठोर रुख के कारण समझौते को लेकर आशंका बनी हुई है. दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावित बातचीत को लेकर मतभेद के संबंध में पूछे गए सवाल पर मनमोहन सिंह ने कहा, ''हम गंभीरता से बातचीत कर रहे हैं. बातचीत जारी है और मुझे काफ़ी उम्मीदें हैं.'' जून के पहले हफ़्ते में जर्मनी में औद्योगिक देशों (जी-8) की शिखर बैठक में अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से मनमोहन सिंह की मुलाक़ात होने की भी संभावना है. इससे पहले जॉर्ज बुश ने इस महीने की शुरुआत में मनमोहन सिंह से टेलीफ़ोन पर बातचीत की थी. इस बीच विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि अमरीका के राजनीतिक मामलों के उप मंत्री निकोलस बर्न्स के भारत आने के बारे में अभी कोई तारीख़ तय नहीं है. बर्न्स विदेश सचिव शिवशंकर मेनन के साथ समझौते से जुड़े कुछ मसले पर बातचीत के लिए यहाँ आने वाले हैं. इस महीने की शुरुआत में वाशिंगटन में मेनन और बर्न्स के बीच बातचीत हुई थी. बैठक में दोनों ने मई के अंत में मिलने पर रज़ामंदी जताई थी. | इससे जुड़ी ख़बरें 'परमाणु समझौते पर उल्लेखनीय प्रगति'02 मई, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु सौदे पर भारत के तेवर कड़े18 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस 'परमाणु परीक्षणों पर रोक मंज़ूर नहीं'10 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु करार पर बुश-मनमोहन की चर्चा21 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस परमाणु सहमति भारत के हित में?22 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस 'नई शर्तें स्वीकार नहीं करेगा भारत'26 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'सामरिक कार्यक्रम पर कोई अंकुश नहीं'07 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस भारत-अमरीका सहमति ऐतिहासिक क्यों?02 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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