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'नई शर्तें स्वीकार नहीं करेगा भारत' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने कहा है कि अमरीका के साथ हुई परमाणु सहमति को लेकर भारत कोई नई शर्तें स्वीकार नहीं करेगा. बुधवार को भारतीय संसद के निचले सदन लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूछे गए सवाल के जवाब में मनमोहन सिंह ने कहा, "अमरीका के साथ परमाणु समझौते में सरकार ने पूरी पारदर्शिता बरती है." उन्होंने कहा, "भारत परमाणु समझौते को लेकर कोई नई शर्तें मंज़ूर नहीं करेगा. हम ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे जो 18 जुलाई के भारत-अमरीका संयुक्त बयान के अनुरूप न हो." मनमोहन सिंह का ये बयान ऐसे समय आया है जब भारत के साथ परमाणु सहमति पर अमरीकी संसद में बुधवार को मतदान होने की संभावना है. इससे पहले भारतीय विदेश राज्यमंत्री आनंद शर्मा ने सदन को आश्वस्त किया कि परमाणु समझौता पिछले वर्ष 18 जुलाई को प्रधानमंत्री और अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू बुश के साझा घोषणापत्र के दाएरे में ही होगा. उन्होंने कहा, "हम 18 जुलाई को जारी घोषणा पत्र से अलग हट कर कोई शर्त स्वीकार नहीं करेंगे. इस मामले पर संसद को विश्वास में लिया जाता रहा है और आगे भी विश्वास में लिया जाएगा." अमरीकी संसद में बहस
इस वर्ष मार्च में अमरीका के राष्ट्रपति बुश की भारत यात्रा के दौरान परमाणु सहमति को अंतिम रुप दिया गया था. इस समझौते के अमल में आने के बाद भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों यानी एनएसजी से परमाणु ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी. उल्लेखनीय है कि भारतीय प्रधानमंत्री की वाशिंगटन यात्रा के दौरान पहली बार इस पर सहमति बनी थी. वाशिंगटन स्थित बीबीसी संवाददाता शाहज़ेब जिलानी के मुताबिक इस सहमति को अमरीकी संसद की प्रतिनिधि सभा की मंजूरी मिल जाने की संभावना है. अमरीका के उपराष्ट्रपति डिक चेनी का कहना है, "परमाणु समझौता राष्ट्रपति बुश के दूसरे कार्यकाल की रणनीतिक विदेशी नीति का अहम पड़ाव है." अमरीकी संसद से हरी झंडी मिलने के बाद इस समझौते पर एनएसजी के सदस्य देशों से भी मंजूरी लेनी होगी. इससे पहले अमरीकी संसद की दोनों सदनों की समितियों ने परमाणु सहमति को अपनी मंज़ूरी दे दी है. वैसे भारत में अमरीका के साथ हुए इस परमाणु समझौते को लेकर कई शंकाएँ ज़ाहिर की जाती रही हैं. एक राजनीतिक वर्ग को संशय होता रहा है कि इस सहमति के लिए भारत अपने हितों के साथ समझौता कर रहा है. हालांकि भारत सरकार इससे इंकार करती रही है. |
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