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परमाणु समझौते पर बात आगे बढ़ी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी संसद के निचले सदन, प्रतिनिधि सभा की अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति ने विवादित भारत-अमरीका परमाणु सहयोग समझौते की पुष्टि कर दी है. अमरीकी कांग्रेस यानि संसद में, इस समझौते को पारित करने की प्रक्रिया में, ये एक महत्वपूर्ण कदम है. बुधवार को सीनेट की अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति इस पर विचार करेगी और यदि वह भी इसकी पुष्टि कर देती है तो प्रतिनिधि सभा और सीनेट इस समझौते पर मतदान करेंगे. यदि इस समझौते को दोनों सदनों का समर्थन प्राप्त होता है तभी ये लागू हो पाएगा. भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के बीच हुए इस समझौते के तहत भारत के परमाणु संयंत्रों के लिए ईंधन और उपकरण उपलब्ध हो पाएँगे.
दूसरी ओर भारत इस समझौते के तहत अपने परमाणु संयंत्रों के निरीक्षण की इजाज़त देगा. महत्वपूर्ण है कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और इस समझौते के आलोचकों का कहना है कि इससे परमाणु अप्रसार की कोशिशों को धक्का लगेगा. इस समझौते को पर्यवेक्षक भारत की ओर अमरीकी की नीति आया बड़ा बदलाव मान रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें जादूगोड़ा की 'जादुई' दुनिया15 मई, 2006 | भारत और पड़ोस 'समझौते पर अमल में एक साल लगेगा'07 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस श्याम सरन ने रुख़ कड़ा किया01 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस 'भारत को परमाणु तकनीक देना उचित'22 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस रूस ने यूरेनियम सौदे को उचित ठहराया17 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'सामरिक कार्यक्रम पर कोई अंकुश नहीं'07 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस भारत-अमरीका में परमाणु सहमति02 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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