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मनमोहन सिंह-जॉर्ज बुश की मुलाक़ात | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की सेंट पीटर्सबर्ग में मुलाक़ात हुई है. दोनों नेताओं के बीच कांस्टेनटीनोवस्की पैलेस में हुई मुलाक़ात के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत अमरीका नागरिक परमाणु सहयोग संधि पर अपनी चिंताओं से राष्ट्रपति बुश को अवगत कराया. दोनों नेताओं के बीच क़रीब 40 मिनट की मुलाक़ात में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने परमाणु समझौते से जुड़े हर तरह के संशय का स्थायी समाधान करने पर बल दिया. संवाद समिति प्रेट्र के अनुसार मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति बुश से परमाणु समझौते को सफल बनाने के लिए निजी समर्थन की मांग की और कहा कि समझौते को लेकर भारतीय संसद में चिंताएं हैं. उन्होंने कहा " हम एक लोकतांत्रिक देश हैं इसके नाते संसद के प्रति जवाबदेह हैं. हमारी संसद पूरी नज़र रखती है कि उसके नेता क्या कर रहे हैं और क्या नहीं कर रहे हैं." मनमोहन सिंह ने कहा " इस मुद्दे पर आपके ( बुश ) प्रयासों की सराहना करता हूं. हमारी कुछ चिंताएं है लेकिन मुझे विश्वास है कि हम सभी समस्याओं का रचनात्मक समाधान निकाल सकेंगे." संवाद समिति एपी के अनुसार दोनों नेताओं के बीच पीटर्सबर्ग में बैठक शुरु होने से पहले बुश ने मनमोहन सिंह से कहा कि इस समझौते पर अमरीका में जो विधेयक आ रहा है वह काफी महत्वपूर्ण है और उन्हें उम्मीद है कि यह पारित हो जाएगा. दोनों देशों द्वारा समझौते को मंज़ूरी मिलने के बाद न्यूकलियर सप्लायर्स ग्रुप को भी इसे अपनी सहमति देनी है. इस अवसर पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम के नारायणन और विदेश सचिव श्याम सरन भी मौजूद थे. मार्च के महीने में राष्ट्रपति बुश ने भारत की यात्रा की थी जिस दौरान दोनों देशों के बीच परमाणु समझौता हुआ था. पीटर्सबर्ग में चल रहे जी आठ सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति बुश और मनमोहन सिंह की मुलाक़ात हुई है. परमाणु समझौता मार्च महीने में राष्ट्रपति बुश की भारत यात्रा के दौरान हुए समझौते के तहत जहां भारत अपने 14 परमाणु रिएक्टरों की अंतरराष्ट्रीय निगरानी के लिए तैयार हुआ था वहीं अमरीका ने भारत को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ईंधन देने का वादा किया था. बुश ने इस समझौते को बेहतरीन करार देते हुए कहा था कि इससे दोनों देशों के बीच सहयोग का नया दौर शुरु हो सकेगा. लेकिन समझौते के आलोचकों का कहना है कि इससे परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की कोशिशों को झटका लग सकता है. अमरीकी सीनेट में इस मुद्दे से जुड़ा विधेयक लाया जाना है और कई अमरीकी सांसदों ने इसका विरोध भी किया है जबकि कई इसके पक्ष में भी हैं. उल्लेखनीय है कि सीनेट की विदेश मामलों की समिति और हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव की अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति ने समझौते को अपनी सहमति दे दी है. |
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