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परमाणु करार पर बुश-मनमोहन की चर्चा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने मनमोहन सिंह के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर बात की है. बुश ने गुरुवार शाम भारतीय प्रधानमंत्री से टेलीफ़ोन पर बातचीत की. इस दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दोनों देशों के बीच असैनिक परमाणु करार पर भारत कि चिंताओं से उन्हें अवगत कराया. दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रिश्तों में आई मजबूती पर खुशी जताई जो अमरीकी क़ानून में संशोधन के लिए बुश की पहल से झलकता है. इसी संशोधन से दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते का रास्ता साफ़ हुआ है. ग़ौरतलब है कि अमरीकी संसद के दोनों सदनों से असैनिक परमाणु सहयोग संबंधी विधेयक भारी मतों से पारित हुआ और जॉर्ज बुश भी इस पर मुहर लगा चुके हैं. हालाँकि मनमोहन सिंह ने बातचीत के दौरान कुछ मुद्दों पर भारत की चिंताओं से उन्हें अवगत कराया. दोनों नेताओं ने उम्मीद जताई समझौते को लेकर जो भी शंकाएं बची हैं उन्हें अगली दौर की बातचीत में सुलझा लिया जाएगा. दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय मुद्दों समेत अन्य विषयों पर भी बात की. ग़ौरतलब है कि भारत में विपक्षी पार्टियों ने अमरीकी संसद से पारित विधेयक कुछ प्रावधानों को भारत के हितों के ख़िलाफ़ करार दिया है. हालाँकि राष्ट्रपति बुश ने विधेयक पर दस्तख़त करने के दौरान कुछ विवादास्पद प्रावधानों पर कहा था कि ये अमरीकी विदेश नीति का अनिवार्य हिस्सा नहीं हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'परमाणु परीक्षण के विकल्प खुले हैं'19 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस परमाणु कार्यक्रम बंद करने का दबाव बढ़ा21 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना बुश ने परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए18 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना वामपंथी भी परमाणु संधि से ख़ुश नहीं11 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस भाजपा ने परमाणु संधि का विरोध किया10 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस भारत-अमरीका परमाणु समझौता मंज़ूर09 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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