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'अप्रसार क्षेत्र में क़रार बड़ी सफलता' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शुक्रवार को परमाणु सुरक्षा के मामले पर होने वाली अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की बैठक से पहले अमरीका ने कहा है कि भारत का समझौता परमाणु अप्रसार मामले में एक बड़ी कामयाबी है. अमरीका इस समय आईएईए और परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों (एनएसजी) के बीच भारत-अमरीका असैनिक परमाणु समझौते के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है. आईएईए में अमरीका के राजदूत ग्रेगरी एल शटल ने इस सुरक्षा समझौते को भारत के हक़ में फ़ायदेमंद बताया और कहा कि ये समझौता 'एक अच्छी ख़बर' है. शटल ने कहा कि भारत के साथ सुरक्षा समझौते के बाद संयुक्त राष्ट्र के निगरानीकर्ता भारत के असैन्य परमाणु केंद्रों का दौरा कर सकेंगे. शुक्रवार एक अगस्त को आईएईए का बोर्ड ऑफ गवर्नर्स भारत के सुरक्षा समझौते पर ग़ौर करने जा रहा है. ग्रेगरी शटल ने कहा कि आईएईए से मंज़ूरी मिल जाने के बाद भारत एनएसजी देशों के साथ समझौते कर सकेगा, जो कि वो पिछले तीन दशकों से नहीं कर पा रहा था. आईएईए की इस बैठक में शामिल होने के लिए भारत के परमाणु मामले के उच्चाधिकारी ऑस्ट्रिया की राजधानी वियाना पहुँच चुके हैं. ये अधिकारी परमाणु सुरक्षा मामले में भारत का पक्ष रखने के साथ-साथ एनएसजी सदस्य देशों के अधिकारियों से भी मुलाक़ात करेंगे ताकि भारत-अमरीका परमाणु संधि के लिए जल्द से जल्द हरी झंडी मिल जाए. काकोदकर मिलेंगे अधिकारियों से सूत्रों के मुताबिक अमरीका ने पिछले दिनों 45 एनएसजी देशों को एक मसौदा भिजवाया था जिसमें समझौते के बाद परमाणु परीक्षण करने या सीटीबीटी का कहीं ज़िक्र नहीं था. समाचार एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि इस बात ने भारत के परमाणु क़रार से जुड़े अधिकारियों को कुछ नाराज़ भी किया था. इस मसौदे के बाद से ही परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अनिल काकोदकर ने भाग-दौड़ तेज़ कर दी थी. एक अगस्त को होने वाली बैठक के बाद अमरीका एनएसजी देशों को एक आखिरी दस्तावेज़ जारी करेगा जिसमें भारत की माँगों पर ग़ौर करने की बात होगी. काकोदकर आईएईए के 35 सदस्य देशों के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स से भी एक-एक कर मुलाक़ात कर रहे हैं और एनएसजी सदस्य देशों के अधिकारियों से भी मिलेंगे. |
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