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एनएसजी में समर्थन जुटाने की तैयारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लोकसभा में अपना बहुमत साबित करने के बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार अमरीका के साथ हुए असैनिक परमाणु समझौते पर अमल की दिशा में अब तेज़ी से क़दम बढ़ाने को तैयार है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ सरकार ने कुछ मंत्रियों और अधिकारियों को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) के सदस्य देशों का समर्थन हासिल के काम पर लगाया जा रहा है. सरकारी सूत्रों के हवाले से पीटीआई ने कहा है कि ऐसे मंत्री और अधिकारी एनएसजी के सदस्य देशों की यात्रा पर जाने वाले हैं. सुरक्षा उपाय समझौते पर फ़ैसले के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निदेशक मंडल की अगले महीने की शुरुआत में बैठक हो रही है. इसके बाद परमाणु समझौते पर अमल के लिए भारत को 45 सदस्यों वाले एनएसजी के देशों का समर्थन हासिल करना होगा. परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तख़त नहीं करने के कारण इन देशों ने भारत के साथ परमाणु कारोबार पर बंदिश लगा रखी है. कोशिश भारत को भरोसा है कि जब उसे छूट देने का मामला एनएसजी के सामने होगा तो अमरीका के प्रभाव का उसको लाभ मिलेगा. फिर भी भारत अपने स्तर पर सदस्य देशों का समर्थन हासिल करने में कोई कसर नहीं उठाना चाहता.
भारतीय अधिकारी एनएसजी के सदस्य देशों के सामने अपना पक्ष रखेंगे और असैनिक परमाणु कारोबार की अनुमति देने के लिए राज़ी करने की कोशिश करेंगे. परमाणु करार पर अमल की दिशा में बढ़ने के सवाल पर चार साल से ज़्यादा समय तक सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने इसी महीने की शुरुआत में समर्थन वापस ले लिया था. लोकसभा में 22 जुलाई को बहुमत साबित करने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस क़रार पर तेज़ी से काम करने की तैयारी शुरू कर दी है. अमरीका के राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश का कार्यकाल आख़िरी चरण में है और वे चाहते हैं कि क़रार को उनके रहते ही अमरीकी संसद से अनुमोदन मिल जाए. पीटीआई का कहना है कि केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, पृथ्वीराज चौहान और आनंद शर्मा के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन, विदेश सचिव शिवशंकर मेनन इस मक़सद को पूरा करने के लिए विदेश यात्रा करेंगे. इन मंत्रियों और अधिकारियों के अलावा विदेश मंत्रालय के भी अधिकारी हैं जो समर्थन जुटाने की कोशिश में विदेश दौरे करेंगे. माना जा रहा है कि सरकार एनएसजी के सदस्य देशों में तैनात अपने राजदूतों को वहाँ की सरकार से इस संबंध में बातचीत शुरू करने को कह सकती है. |
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