BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शनिवार, 06 सितंबर, 2008 को 10:58 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
परमाणु समझौते को एनएसजी की मंज़ूरी
मनमोहन सिंह और जॉर्ज बुश
तीन साल पहले भारत और अमरीका में परमाणु समझौते पर सहमति बनी थी
भारत-अमरीका परमाणु समझौते को 45 देशों के परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह (एनएसजी) ने आख़िरकार अपनी मंज़ूरी दे दी है.

कुछ देशों की आपत्तियों के बीच इस मंज़ूरी के लिए अमरीका और भारत को अपने कुछ मित्र देशों के साथ मिलकर ख़ासी मशक्कत करनी पड़ी और तब जाकर तीसरे दिन की बैठक में यह फ़ैसला लिया गया.

इस मंज़ूरी के साथ ही भारत के साथ परमाणु सौदों पर 34 साल से लगा प्रतिबंध ख़त्म हो गया है. हालांकि अभी मंज़ूरी के विवरण नहीं मिले हैं.

इस समझौते को लागू करने के लिए अब इसे अमरीकी संसद के सामने मंज़ूरी के लिए रखा जाएगा.

स्वागत

भारत के प्रधानमंत्री ने एनएसजी की मंज़ूरी को दूरगामी और महत्वपूर्ण फ़ैसला है.

उन्होंने कहा है कि इससे परमाणु और तकनीक के क्षेत्र में कई दशकों से भारत के अलग-थलग पड़े रहने का समय समाप्त होगा.

 हमें प्रसन्नता है कि आख़िर हम वो वादा निभाने में सफल रहे जो हमने संसद में और भारत की जनता के सामने किया था
प्रणव मुखर्जी, विदेश मंत्री

उन्होंने कहा कि यह परमाणु अप्रसार के क्षेत्र में भारत की विश्वसनीयता और परमाणु तकनीक के क्षेत्र में भारत की स्थिति का प्रमाण है.

एनएसजी की मंज़ूरी के बाद मनमोहन सिंह ने अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से भी फ़ोन पर बात की है.

भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने इस मंज़ूरी का स्वागत करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के क्षेत्र में भारत के दूसरे देशों के साथ सहयोग का एक नया अध्याय शुरु होगा.

प्रणव मुखर्जी ने कहा, "हमें प्रसन्नता है कि आख़िर हम वो वादा निभाने में सफल रहे जो हमने संसद में और भारत की जनता के सामने किया था."

भारत में सत्तारूढ़ गठबंधन की मुख्यपार्टी कांग्रेस के नेताओं ने इसे भारत की एक बड़ी जीत बताया है.

जबकि भारतीय जनता पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं ने कहा है कि वे जानना चाहते हैं कि यह मंज़ूरी किन शर्तों पर मिली है.

भारत के प्रमुख परमाणु वैज्ञानिकों में से एक के संथानम ने कहा है कि यह एक महत्वपूर्ण निर्णय है और इससे भारत के लिए परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में कई दरवाज़े खुल जाएँगे.

उनका कहना है कि इससे भारत और अमरीका को फ़ायदा ही फ़ायदा दिखता है और उनकी नज़र में दोनों देशों को इसे हासिल करने के लिए कुछ खोना नहीं पड़ा है.

अड़चनें

इस समझौते को एनएसजी की मंज़ूरी का रास्ता आसान नहीं था क्योंकि न तो भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए हैं और न वह भविष्य परमाणु परीक्षण करने के अपने अधिकार को खोना चाहता है.

21 और 22 अगस्त को पहले दौर की बैठक में इस समझौते को मंज़ूरी देने के मामले में सहमति नहीं बन सकी थी और दूसरे दौर की बैठक बुलानी पड़ी.

एनएसजी की बैठक
एनएसजी की मंज़ूरी के लिए सदस्य देशों में सर्वसम्मति होना ज़रुरी था

गुरुवार और शुक्रवार को दूसरे दौर की बैठक के बाद भी यह असमंजस बना हुआ था कि इस समझौते को मंज़ूरी मिलेगी या नहीं.

दरअसल ऑस्ट्रिया, स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, न्यूज़ीलैंड और आयरलैंड इस बात पर अड़े हुए थे कि परमाणु ईंधन, उपकरणों और परमाणु तकनीक के अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारत को बिना शर्त प्रवेश देना ठीक नहीं होगा.

इनका कहना था कि परमाणु अप्रसार संधि और व्यापक परमाणु परीक्षण निषेध संधि पर दस्तख़त किए बगैर भारत को इस तरह की छूट नहीं दी जा सकती.

इसके अलावा भारत के पड़ोसी देश चीन को इस बात पर आपत्ति थी कि आख़िर भारत और अमरीका को इतनी जल्दी किस बात की है.

जहाँ तक परमाणु अप्रसार की बात है तो भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने ये दोहरा कर एनएसजी के देशों को भरोसे में लेने की कोशिश की थी कि भारत ने स्वेच्छा से परमाणु परीक्षणों पर रोक लगा रखी है.

लेकिन भारत इस रुख़ पर कायम रहा कि भविष्य में परमाणु परीक्षण करने पर परमाणु ईंधन की आपूर्ति रोक देने के प्रस्ताव को वह समझौते में शामिल नहीं करेगा.

विएना में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन का कहना है कि विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी के बयान ने एनएसजी के कई देशों को मनाने में सकारात्मक भूमिका निभाई.

अनिल काकोदकरसामरिक कार्यक्रम
अनिल काकोदकर का कहना है कि सामरिक कार्यक्रम पर समझौता नहीं हो सकता.
प्रणव मुखर्जी'धोखे का सवाल नहीं'
विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि वाम को कोई धोखा नहीं दिया गया.
आडवाणी'गुमराह न करें...'
लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि अल्पमत यूपीए सरकार जनता को गुमराह न करे.
भारत का एक परमाणु रिएक्टरनफ़ा-नुकसान...
भारत और अमरीका के बीच हुए परमाणु समझौते के फ़ायदे-नुकसान पर विवेचना.
इससे जुड़ी ख़बरें
एनएसजी बैठक में अनिश्चय बरक़रार
06 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस
परमाणु समझौते पर विपक्ष ने उठाए सवाल
03 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस
एनएसजी में समर्थन जुटाने की तैयारी
23 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस
परमाणु समझौते को लेकर अहम बैठक
30 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>