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अमरीकी सीनेट की समिति ने मंज़ूरी दी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी सीनेट की विदेश मामलों की समिति ने मंगलवार को भारत-अमरीका परमाणु समझौते को मंज़ूरी दे दी. समिति में इस पर मतदान हुआ और समझौते को 2 के मुक़ाबले 19 वोट से मंज़ूरी मिली. अब ये समझौता सीनेट के समक्ष पेश किया जाएगा. अमरीकी संसद का सत्रावसान 26 सितंबर को हो रहा है और बुश प्रशासन को अमरीकी सांसदों को राज़ी करना होगा कि वे सत्रावसान से पहले ही इस समझौते को मंज़ूरी दे दें. अमूमन ऐसे समझौतों को पारित करने के लिए 30 दिनों का सत्र बुलाए जाने की ज़रूरत होती है. लेकिन 26 सितंबर को सत्रावसान हो रहा है. इसलिए संसद को इससे पहले ही इस समझौते को मंज़ूरी देनी होगी. बुश प्रशासन को इस गंभीरता का अहसास है. इसके पहले अमरीकी विदेश उपमंत्री रिचर्ड बाउचर ने कहा था, '' हमें अंदाज़ा है कि संसद के पास समय काफ़ी कम है और उसके सामने करने को बहुत से काम हैं लेकिन उम्मीद करनी चाहिए कि संसद किसी तरह इसके लिए समय निकालेगी.'' ग़ौरतलब है कि भारत-अमरीका परमाणु समझौते को परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह की मंज़ूरी मिलने के बाद अब सिर्फ़ अमरीकी कांग्रेस से भारत-अमरीका परमाणु समझौते को अंतिम मंज़ूरी मिलनी बाक़ी है. भारत-अमरीका के बीच हुए 123 समझौते पर अमरीकी संसद को हरी झंडी देनी होगी, उसके बाद ही ये समझौता प्रभावी हो पाएगा. |
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