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'भारत का एटमी वनवास ख़त्म' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के सभी अख़बारों ने परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों (एनएसजी) से भारत-अमरीका परमाणु समझौते को मंज़ूरी मिलने की ख़बर को प्रमुखता से छापा है. लगभग सभी अख़बारों ने इस एनएसजी से मंज़ूरी को भारत के लिए अहम बताया है. संडे नवभारत टाइम्स ने शीर्षक लगाया है- एटमी वनवास ख़त्म. अख़बार लिखता है कि इससे कांग्रेस के हौसले बुलंद हुए हैं और पार्टी अब लोकसभा चुनाव का समय अपने हिसाब से तय कर सकेगी. नवभारत टाइम्स का कहना है कि समझौते पर चले अनिश्चितता के दौर ने विपक्ष के हौसले बढ़ा दिए थे, यहाँ तक कि भाजपा और वामपंथियों को चुनाव नजदीक दिखने लगे थे. हिंदुस्तान की सुर्खी है- परमाणु पंगत में शामिल भारत, एनएसजी फतह. अख़बार लिखता है कि क़रीब 34 साल पहले भारत के परमाणु परीक्षण करने पर एनएसजी का गठन हुआ था, उसी संगठन ने भारत के परमाणु वनवास को समाप्त कर दिया है. राष्ट्रीय सहारा ने शीर्षक लगाया है-वियना में विजय. समाचार पत्र का कहना है कि 34 साल बाद खुला भारत के परमाणु कारोबार का रास्ता. दैनिक जागरण की सुर्खी है- भारत नाभिकीय बिरादरी में, बिना शर्त एनएसजी ने दी परमाणु कारोबार की छूट. अख़बार लिखता है कि इसे अमरीकी कूटनीतिक दबाव का करिश्मा कहें या फिर नई दिल्ली की तरफ से परमाणु अप्रसार के आश्वासन का असर, एनएसजी ने भारत को नाभिकीय बिरादरी में शामिल कर लिया है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की हेडिंग है- इंडिया न्यूक्लियर ऐबल्ड. अख़बार लिखता है कि 76 घंटे की ड्रामे के बाद भारत के लिए दरवाज़े खुले. हिंदुस्तान टाइम्स लिखता है कि 36 वर्षों का अलगाव 26 घंटे में ख़त्म हुआ. पायनियर ने सबसे अलग हेडिंग लगाई है. अख़बार लिखता है-सेल आउट यानि भारत इस मंज़ूरी को पाने में बिक गया. |
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