BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शुक्रवार, 12 सितंबर, 2008 को 17:02 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
बुश के बयान पर भारत का जवाब
बुश
बुश का कहना है कि समझौते में ईंधन आपूर्ति की बाध्यता नहीं है
परमाणु समझौते पर अमरीकी राष्ट्रपति बुश के ताज़ा बयान के जवाब में भारत ने स्पष्ट किया है कि परमाणु समझौता 123 समझौते के मुताबिक लागू होगा.

अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने यह कहकर भारत को चिंता में डाल दिया है कि परमाणु की ईंधन की 'आपूर्ति की क़ानूनी बाध्यता नहीं है'.

बुश ने भारत के साथ हुए 123 समझौते को अमरीकी संसद में रखते हुए ये विचार व्यक्त किए हैं.

लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने शुक्रवार को नई दिल्ली में कहा कि जब 1-2-3 समझौता लागू हो जाएगा तब परमाणु ईंधन के कारोबार में यही वैधानिक दस्तावेज़ होगा जो अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संधियों के स्वीकृत सिद्धांतों की बुनियाद पर बना है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि अमरीका के साथ असैनिक परमाणु सहयोग सिर्फ़ 1-2-3 समझौते से निर्देशित होगा जिसमें दोनों देशों के अधिकारों और कर्तव्यों की स्पष्ट चर्चा की गई है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस स्थिति में भारत अपने अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करेगा.

नवतेज सरना ने कहा, "भारत-अमरीका के बीच हुए इस समझौते पर दोनों देशों की सरकारों की मुहर लगी है. यह दस्तावेज़ सार्वजनिक है."

अमरीकी रुख़

भारतीय विश्लेषकों की राय में जॉर्ज बुश 1-2-3 समझौते को अलग तरह से बयान कर रहे हैं.

एक वरिष्ठ भारतीय अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में बुश के इस विचार पर आश्चर्य प्रकट किया है और माना जा रहा है कि भारत जल्द ही अमरीका से स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहेगा.

भारतीय सूत्रों का कहना है कि 123 समझौते में स्पष्ट लिखा है कि इसके लागू होने के बाद भारत को परमाणु ईंधन की अबाध आपूर्ति कराना अमरीका की ज़िम्मेदारी होगी.

 समझौते में साफ़ लिखा है कि ईंधन की आपूर्ति क़ानूनी बाध्यता है, अगर बुश इससे मुकर रहे हैं तो भारत के लिए समझौते पर हस्ताक्षर करना बहुत मुश्किल हो जाएगा
सिद्धार्थ वरदराजन, वरिष्ठ पत्रकार

भारत अमरीका परमाणु समझौते पर क़रीब से नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन कहते हैं, "समझौते में साफ़ लिखा है कि ईंधन की आपूर्ति क़ानूनी बाध्यता है, अगर बुश इससे मुकर रहे हैं तो भारत के लिए समझौते पर हस्ताक्षर करना बहुत मुश्किल हो जाएगा."

123 समझौते के मुताबिक़ यह अमरीका की ज़िम्मेदारी होगी कि वह 'अंतरराष्ट्रीय परमाणु ईंधन बाज़ार से निर्बाध रूप से पर्याप्त कच्चा माल भारत को उपलब्ध कराने में' मदद करेगा.

इससे पहले भी इस तरह की स्थिति पैदा हो चुकी है जब अमरीकी विदेश विभाग की एक चिट्ठी मीडिया में लीक हो गई थी जिसमें कहा गया था कि अगर भारत ने परमाणु परीक्षण किया तो अमरीका परमाणु ईंधन की सप्लाई बंद कर देगा.

इस चिट्ठी के लीक होने के बाद भारत के प्रमुख विपक्षी राजनीतिक दलों, ख़ास तौर पर भारतीय जनता पार्टी और वामपंथी दलों ने सरकार की कड़ी आलोचना की थी और समझौते को लेकर अपनी चिंता को ज़ोरदार तरीक़े से दोहराया.

भारत अमरीकी झंडेक़रारः आगे का रास्ता
एनएसजी की मंज़ूरी के बाद भारत के लिए अब आगे क्या रास्ता दिखाई देता है...
भारत का एक परमाणु संयंत्र'भारत ने पाया है'
के संथानम का कहना है कि समझौते से भारत ने पाया ही पाया है खोया कुछ नहीं.
भारत का एक परमाणु संयंत्र'भारत ने खोया है'
ब्रह्मा चेलानी कहते हैं कि समझौते से भारत के सामरिक विकल्प घट रहे हैं.
इससे जुड़ी ख़बरें
परमाणु समझौते को एनएसजी की मंज़ूरी
06 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस
एनएसजी बैठक में अनिश्चय बरक़रार
06 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस
परमाणु समझौते पर विपक्ष ने उठाए सवाल
03 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस
एनएसजी में समर्थन जुटाने की तैयारी
23 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस
परमाणु समझौते को लेकर अहम बैठक
30 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>