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'ईरान सहयोग या टकराव का रास्ता चुने' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने कहा है कि ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम के विषय में या तो सहयोग का रास्ता अपनाना होगा या फिर टकराव का. कल जेनेवा में यूरोपीय संघ के कूटनीतिक मामलों के प्रमुख हाविए सोलाना के साथ अमरीका के सहायक विदेश मंत्री विलियम बर्न्स मौजूद थे जबकि ईरान की ओर से प्रमुख वार्ताकार सईद जलीली ने वार्ता में हिस्सा लिया. तीस साल में ये पहली बार था जब अमरीका और ईरान के वार्ताकार ने आमने-सामने बातचीत की. विलियम बर्न्स अमरीकी विदेश मंत्रालय के तीसरे सबसे वरिष्ठ मंत्री हैं. ऐसे में बातचीत से अपेक्षा काफ़ी थी लेकिन नतीजा अलग अलग पक्षों के मुताबिक अलग-अलग था. ईरान के वार्ताकार सईद जलीली ने कहा कि दोनों पक्षों ने सकारात्मक बातें कहीं. उन्होंने कहा,“हमने जिस पैकेज का प्रस्ताव रखा है उससे काफ़ी संभावनाएँ पैदा होती हैं. संक्षेप में ये एक अवसर है जिसे हमें खोना नहीं चाहिए. ये एक पैकेज है जिसमें हमारे सहयोग की संभावना है, ऐसा सहयोग, जो स्थायित्व, शांति, सुरक्षा और लोकतंत्र का रास्ता साफ़ कर सके.” लेकिन दूसरी ओर, यूरोपीय संघ के प्रमुख हाविए सोलाना ने कहा कि बातचीत से वो हल नहीं निकला जिसकी उन्हें उम्मीद थी जिसका अर्थ ये निकाला जा रहा है कि ईरान ने यूरेनियम के संवर्धन को बंद करने के बारे में कोई वादा नहीं किया. ईरान के साथ सीधी बातचीत करने की कोशिश को अमरीका के रवैए में आए एक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. अमरीका और ज्यादातर यूरोपीय देश चाहते हैं कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम रोक दे लेकिन ईरान इसके लिए तैयार नहीं हैं. पश्चिमी देशों का कहना है कि ईरान परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की आड़ में परमाणु हथियार बनाना चाहता है जबकि ईरान ज़ोर देकर कहता रहा है कि उसका ऐसा कोई इरादा नहीं है. ईरान का कहना है कि परमाणु ऊर्जा का उत्पादन उसकी संप्रभुता का मामला है और वह इस पर कोई समझौता नहीं करेगा, पश्चिमी देश ईरान को आर्थिक सहायता का पैकज देकर उसे परमाणु कार्यक्रम रोकने पर राज़ी करना चाहते हैं. |
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