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शनिवार, 21 जून, 2008 को 16:41 GMT तक के समाचार
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ईरान ने कहा इसराइली हमला असंभव
इसराइल का एक परमाणु ठिकाना
जानकारों का कहना है कि इसी स्थान पर ईरान यूरेनियम संवर्धन कर रहा है
ईरान ने कहा है कि उसके परमाणु ठिकानों पर इसराइल ने हमला करने की जो धमकी दी है वो "एक असंभव" बात है.

ईरान सरकार के प्रवक्ता ग़ुलाम हुसैन इलहाम ने कहा है, "हमारे देश के हितों और क्षेत्रीय अखंडता पर हमला करने की बात एक धूर्तता और असंभव बात होगी."

ईरान के इस बयान से पहले अमरीकी मीडिया में इस तरह की ख़बरें छपी थीं कि इसराइली विमानों ने भूमध्य सागर के ऊपर जो कुछ उड़ानें भरी थीं वे संभवतः ईरान पर हमले का पूर्वाभ्यास था.

ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों और ऊर्जा ज़रूरतें पूरी करने के लिए है जबकि इसराइल और पश्चिमी देशों का कहना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के लिए यह कार्यक्रम चला रहा है.

ईरान ने पश्चिमी देशों की यह माँग ख़ारिज कर दी है कि वह परमाणु कार्यक्रम के तहत यूरेनियम संवर्धन का अपना कार्यक्रम बंद कर दे. यूरेनियम संवर्धन का इस्तेमाल ऊर्जा उत्पादन करने वाले संयंत्रों में ईंधन के तौर पर होता है और अगर यूरेनियम को कुछ और ज़्यादा शुद्ध तरीके से संवंर्धित किया जाए तो इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में भी किया जा सकता है.

संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी आईएईए के मुखिया डॉक्टर मोहम्मद अल बारादेई इस बीच कह चुके हैं कि अगर ईरान पर कोई हमला किया जाता है तो इससे ईरान परमाणु हथियार बनाने के रास्ते पर और तेज़ी से चल निकलेगा और मध्य पूर्व क्षेत्र में अशांति फैल जाएगी.

बारादेई ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान के मौजूदा परमाणु कार्यक्रम को देखकर ऐसा नहीं लगता कि उससे फिलहाल परमाणु प्रसार का कोई ख़तरा हो.

अल अरबिया टेलीविज़न चैनल को दिए एक इंटरव्यू में बारादेई ने कहा कि अगर ईरान पर कोई हमला किया जाता है तो ऐसी स्थिति में उनका परमाणु एजेंसी के अध्यक्ष के तौर पर काम करना असंभव हो जाएगा.

'इसराइली अभ्यास'

न्यूयॉर्क टाइम्स में शुक्रवार को रिपोर्ट छपी थी कि इसराइल के लड़ाकू विमानों ने भूमध्यसागर में जो उड़ानें भरी थीं, दरअसल वो ईरान पर संभावित हमले का पूर्वाभ्यास था.

इसराइल का एक लड़ाकू विमान
सैनिक अभियास में इसराइल के 100 से ज़्यादा लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया

अख़बार ने अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के अधिकारियों के हवाले से लिखा था कि इसराइली अभ्यास में 100 से ज़्यादा लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया था.

रिपोर्ट में पेंटागन के अधिकारियों के हवाले से कहा गया था कि इस इसराइली अभ्यास का इरादा ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम मुद्दे पर इसराइल की चिंता को दर्शाना था और यह भी कि इसराइल इस मामले में इकतरफ़ा तौर पर कोई कार्रवाई कर सकता है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि हेलीकॉप्टरों और ईंधन मुहैया कराने वाले हवाई टैंकरों ने भी 1400 किलोमीटर तक की उड़ानें भरीं. लगभग इतना ही फ़ासला इसराइल और ईरान के मुख्य परमाणु संयंत्र - नतांज़ के बीच है. ख़बरें हैं कि ईरान यूरेनियम संवर्धन इसी संयंत्र में करता है.

न्यूयॉर्क टाइम्स ने ख़बर छापी कि इसराइली अधिकारयों ने हालाँकि इस उड़ान अभ्यास के बारे में कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया. अमरीकी विदेश मंत्रालय ने भी इस सैनिक अभ्यास के बारे में कुछ नहीं कहा है.

बातचीत का प्रस्ताव

कहा जा रहा है कि ईरान छह विश्व शक्ति देशों के प्रारंभिक बातचीत शुरू करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है. बातचीत के शुरूआती दौर में औपचारिक बातचीत का ढाँचा तैयार किया जाएगा और क्या रियायतें दी जा सकती हैं उस बारे में भी चर्चा होगी.

यह बातचीत शुरू करने की शर्त रखी गई है कि ईरान अपना यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम छह सप्ताह के लिए स्थगित कर दे और उसके बदले छह शक्तिशाली देश ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों के अपने दबाव को कम कर देंगे.

यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख हाविए सोलाना ने प्रारंभिक बातचीत का यह प्रस्ताव पिछले सप्ताह तेहरान में हुई बातचीत के दौरान ईरान सरकार के सामने रखा था. इस प्रस्ताव को अमरीका, चीन, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी ने तैयार किया है. इनमें से जर्मनी के अलावा बाक़ी पाँच देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य भी हैं.

सोलाना ने कहा है कि यह सभी छह देश ईरान के इस अधिकार को पूरी तरह से मान्यता देने के लिए राज़ी हैं कि ईरान को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु कार्यक्रम चलाने का पूरा अधिकार है.

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