|
छह दिन की जंग ने बदल दिया नक्शा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चालीस साल पहले इसराइल और अरब देशों के बीच इसी दिन शुरु हुआ युद्ध हालाँकि छह दिन ही चला था, लेकिन इसने पूरे मध्यपूर्व का नक्शा ही बदल दिया दरअसल, '1967 की छह दिन की जंग' में एक तरफ़ इसराइल था और उसके सामने थे उसके तीन पड़ोसी देश मिस्र, जॉर्डन और सीरिया. इन पक्षों के बीच वो तीसरी लड़ाई थी. इन देशों की इसराइल के साथ पहली लड़ाई 1948 में हुई थी. इस लड़ाई के बाद पूर्वी यरुशलम और जॉर्डन नदी के पश्चिमी तट का इलाका जॉर्डन के क़ब्जे में चला गया जबकि तटीय गज़ा पट्टी पर मिस्र ने अधिकार कर लिया. 1956 में इसलाइल ने गज़ा पट्टी और मिस्र के सिनाइ प्रायद्वीप पर हमला बोल दिया, लेकिन अगले ही साल उसे सिनाइ क्षेत्र से हटना पड़ा और इस क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र की आपात सेना तैनात कर दी गई. हमले की शुरुआत इसके बाद क्षेत्र में लगातार तनाव बढ़ता गया और नवगठित फ़लस्तीनी चरमपंथी गुटों ने अरब देशों के सहयोग से सीमा पार से हमले करने शुरू कर दिए. मिस्र के राष्ट्रपति गमाल अब्दुल नासर ने अरब देशों की एकता पर ज़ोर दिया और वो 'इसराइल की बर्बादी' के ख़िलाफ़ भी बोले जिसके परिणामस्वरुप इसराइल को हमेशा ये डर रहा कि उसे निशाना बनाया जा सकता है.
मई 1967 में राष्ट्रपति नासर ने सिनाइ से संयुक्त राष्ट्र आपात सेना को हटाने, ताइरान और इसराइल के बीच समुद्र मार्ग बंद करने की माँग की. साथ ही उन्होंने जॉर्डन के साथ सुरक्षा समझौता भी किया. कुछ इतिहासकारों का कहना है कि नासर के इन क़दमों और उसके बाद सिनाई में मिस्र के सैनिकों की तैनाती के कारण इसराइल ने उस पर हमला बोल दिया. इसराइल अभी भी ये कहता है कि उसने अपने बचाव में पहले हमला किया था. इसराइली हमला पाँच जून को इसराइली समयानुसार सुबह पौने आठ बजे इसराइल ने ऑपरेशन फ़ोकस शुरू किया और मिस्र के 11 हवाई ठिकानों पर आक्रमण कर रनवे पर खड़े लगभग 311 विमानों को नष्ट कर दिया. इन हमलों में मिस्र के दर्जनों पायलट भी मारे गए. इसके अलावा इसराइल ने सीरिया, इराक़ और जॉर्डन के सैन्य ठिकानों पर भी बम गिराए. इन हमलों में इसराइल की वायुसेना को काफी नुकसान हुआ और उसके 19 विमान नष्ट हो गए. इनमें से अधिकाँश यांत्रिक गड़बड़ी या दुर्घटना का शिकार हुए. इसराइल के पाँच पायलट मारे गए और पाँच को मिस्र की सेना ने क़ैद कर लिया.
पूर्वी यरुशलम के उत्तर में स्थित एमुनिशन पहाड़ी पर इसराइल और जॉर्डन की सेनाओं के बीच भीषण लड़ाई हुई. इस लड़ाई में जॉर्डन के 106 के और इसराइल के 37 सैनिक मारे गए. मिस्र के फील्ड मार्शल अब्द अल हकीम ने अपनी सेना से भारी हथियार नष्ट करने और स्वेज़ नहर के रास्ते पीछे हटने का आदेश दिया. संयुक्त राष्ट्र की पहल छह जून को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई गई. संयुक्त राष्ट्र ने संघर्षविराम और युद्धपूर्व स्थिति बनाने का प्रस्ताव दिया, लेकिन तत्कालीन सोवियत संघ ने इसे नामंजूर कर दिया. सात जून को यरुशलम के पुराने शहर पर इसराइली सैनिकों कब्जे के बाद उनके लगभग एक हज़ार सैनिकों ने एक रेडियो संदेश सुना, जिसमें कहा गया था, "हर हबाइत बेयाडेन्यू" यानी मंदिर का शिखर हमारी मुट्ठी में है. इसके कुछ ही देर बाद यरुशलम में जॉर्डन के गवर्नर अनवर अल हतीब ने आधिकारिक तौर पर आत्मसमर्पण कर दिया. इसराइल की इस जीत का जश्न मनाने के लिए रक्षा मंत्री मोशे डयान और चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ यित्ज़ाक राबिन यरुशलम पहुँचे.
आक्रमण का असर इस आक्रमण का असर ये रहा कि पश्चिमी तट पर रह रहे लाख़ों फ़लस्तीनियों को जॉर्डन के लिए पलायन को मजबूर होना पड़ा. इसके बाद इसराइली सेना ने जनरल तल, अब्राहम जोफ़े और एरियल शेरोन के नेतृत्व में सिनाइ प्रायद्वीप का रुख़ किया और मिस्र के कमांडर जनरल अब्द अल मोशेन मोर्तगी की सेना को शिकस्त दी. हालाँकि जनरल मोर्तगी के पास 80 हज़ार सैनिक और 1000 से अधिक टैंक थे, लेकिन वायु सेना के सहयोग के बगैर वह कुछ नहीं कर सके. इस जंग में मिस्र के हज़ारों सैनिक मारे गए और बड़ी संख्या में क़ैद कर लिए गए. आठ जून की शाम ढलने तक इसराइल ने स्वेज़ नहर के पूर्वी तट को अपने कब्जे में ले लिया. मिस्र ने अपनी हार स्वीकार कर ली और युद्धविराम के लिए मजबूर हुआ. बड़ा झटका नौ जून को मिस्र के राष्ट्रपति गमाल अब्दुल नासर ने टेलीविजन प्रसारण में अपने इस्तीफ़े की घोषणा कर दी. उन्होंने पश्चिमी देशों पर इसराइल की मदद का आरोप लगाया. उन्होंने इस हार के लिए अरबी शब्द 'नक्स' का इस्तेमाल किया, जिसका अर्थ होता है बड़ा झटका.
हालाँकि राजधानी काहिरा और बेरुत में सड़कों पर हुए ज़ोरदार प्रदर्शन के बाद नेशनल असेंबली ने उनका इस्तीफ़ा ठुकरा दिया. दस जून को सीरिया का सुरक्षा तंत्र ध्वस्त हो गया और सीरिया की फ़ौज इसराइली सेना से उलझे बिना पूर्वी हिस्से में पीछे हट गईं. दोपहर के कुछ ही देर बाद इसराइली सैनिकों ने गोलान पहाड़ी पर कब्जा कर लिया. संयुक्त राष्ट्र युद्धविराम शाम को साढ़े छह बजे प्रभाव में आ गया. छह दिन की इस जंग में इसराइली सेना ने पूरे सिनाइ प्रायद्वीप, पश्चिमी तट, गोलान पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया. कुल मिलाकर इसराइल के नियंत्रण वाले क्षेत्र में चार गुना इजाफ़ा हो गया. इसराइल का कहना है कि इस युद्ध में उसके 776 सैनिक मारे गए. समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार मिस्र के लगभग 11500, जॉर्डन के लगभग 6094 और सीरिया के 1000 सैनिक मारे गए. | इससे जुड़ी ख़बरें एक और फ़लस्तीनी मंत्री गिरफ़्तार26 मई, 2007 | पहला पन्ना हमास के 30 वरिष्ठ राजनेता गिरफ़्तार24 मई, 2007 | पहला पन्ना लेबनान में संघर्ष, 40 से ज़्यादा मरे20 मई, 2007 | पहला पन्ना ग़ज़ा में इसराइल के हवाई हमले जारी18 मई, 2007 | पहला पन्ना गज़ा क्षेत्र में संघर्ष जारी, 20 मरे17 मई, 2007 | पहला पन्ना फ़लस्तीनी गुटों में लड़ाई, आठ की मौत15 मई, 2007 | पहला पन्ना झड़पों के बाद गज़ा में फिर 'समझौता'13 मई, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||