BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शुक्रवार, 26 अक्तूबर, 2007 को 13:16 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
प्रतिबंधों पर ईरान की तीखी प्रतिक्रिया
ईरान की इस्लामी रिवॉल्यूशन गार्ड कोर
इस्लामी गार्ड कोर का गठन 1979 में इस्लामी क्रांति के बाद किया गया था
ईरान ने इस्लामी रिवॉल्यूशन गार्ड कोर और तीन सरकारी बैंकों को निशाना बनाते हुए नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने के फ़ैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इन नए आर्थिक प्रतिबंधों का कोई असर नहीं होगा और वे नाकाम हो जाएंगे.

ईरान की इस्लामी रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर के मुखिया मोहम्मद अली जाफ़री ने अमरीकी आर्थिक प्रतिबंधों पर प्रतिक्रिया का रुख़ तय करते हुए कहा है कि गार्ड इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार है, उतनी, जितनी कि शायद पहले कभी नहीं थी.

ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी इस रुख़ की पुष्टि की है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद अली हुसैनी ने कहा, "ईरान के सम्मानित लोगों और देश की वैध संस्थाओं के प्रति अमरीका की आक्रामक नीतियाँ अंतरराष्ट्रीय क़ानून के ख़िलाफ़ हैं और ये नाकाम हो जाएंगी, जैसाकि पहले भी होता रहा है."

ईरान की राजधानी तेहरान में बीबीसी संवाददाता जॉन लाइन ने कहा है कि अमरीका के नए आर्थिक प्रतिबंध ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए ख़ासे ख़तरनाक साबित हो सकते हैं.

समझा जाता है कि देश की लगभग एक तिहाई अर्थव्यवस्था पर इस्लामी रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर का दबदबा है जिनमें कार फ़ैक्टरियाँ अख़बार और तेल और गैस के भंडार भी हैं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इन प्रतिबंधों के बाद विदेशी कंपनियाँ इस्लामी रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर के नियंत्रण वाली कंपनियों के साथ कारोबार करने से बचेंगी क्योंकि उन्हें अमरीका से आर्थिक बदले की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.

रूस और चीन

इसी दौरान अमरीका के एक वरिष्ठ दूत ने रूस और चीन पर आरोप लगाया है कि वे ईरान की सेना को सहायता दे रहे हैं.

अमरीका के सहायक विदेश मंत्री निकोलस बर्न्स ने कहा है कि रूस को ईरान को हथियार बेचना तुरंत बंद करना चाहिए और चीन को भी ईरान में अपना निवेश बंद करना चाहिए.

निकोलस बर्न्स ने कहा कि रूस और चीन के साथ मतभेदों के बावजूद अमरीका को उम्मीद है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के ख़िलाफ़ नए प्रतिबंधों की पेशकश करने वाले तीसरे प्रस्ताव को नवंबर 2007 में मंज़ूरी मिल जाएगी.

उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ईरान को टकराव का रास्ता छोड़कर बातचीत के रास्ते पर चलने के लिए राज़ी कर लिया जाएगा.

निकोलस बर्न्स ने कहा, "हम बातचीत की मेज़ पर मिलना चाहते हैं. हम विवाद का शांतिपूर्ण हल निकालना चाहते हैं लेकिन कभी-कभी कूटनीति को असरदार बनाने के लिए सख़्त रुख़ अपनाना पड़ता है."

इससे जुड़ी ख़बरें
अली लारीजानी ने इस्तीफ़ा दिया
20 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना
अहमदीनेजाद की कड़ी चेतावनी
22 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>