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ईरान के ख़िलाफ़ नए आर्थिक प्रतिबंध | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने इस आरोप के साथ ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं कि वह आतंकवादियों को समर्थन दे रहा है और परमाणु बम बनाने की कोशिश कर रहा है. इस बार निशाना बनाया गया है ईरान की इस्लामी रिवॉल्यूशन गार्ड कोर और तीन सरकारी बैंकों को. अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कहा है कि ऐसा ईरान के धमकाने वाले बर्ताव का सामना करने की रणनीति के तहत किया जा रहा है. अमरीका ईरान पर आरोप लगाता रहा है कि वो इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में विद्रोहियों को हथियार और प्रशिक्षण देता है. ईरान पर अमरीका के नए आर्थिक प्रतिबंधों के बारे में विश्लेषकों का कहना है कि इसका ईरान की अर्थव्यवस्था पर काफ़ी असर पड़ सकता है लेकिन कूटनीतिक तौर पर इसका कितना असर होगा ये तो समय ही बताएगा. अमरीका में पिछले क़रीब दो महीने से नीति निर्धारक इस बारे में विचार कर रहे थे कि ईरान के ख़िलाफ़ नए प्रतिबंध लाए जाएँ और वो किस तरह के हों ताकि उनका ज़्यादा से ज़्यादा असर ईरान पर हो. अमरीका ने अब जिन प्रतिबंधों की घोषणा की है उनमें ईरान की इस्लामी रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर, तीन बैंक और कुछ ईरानी लोग शामिल हैं. प्रतिबंधों के बाद अब अमरीका का कोई भी संगठन या व्यक्ति इन ईरानी संगठनों के साथ व्यापार नहीं कर सकेगा. बीबीसी संवाददाता जॉन लाइन का मानना है कि ईरान की पहले से बिगड़ती अर्थव्यवस्था में अमरीका के इन प्रतिबंधों का व्यापक असर होगा. अमरीका का कहना है कि ईरान की सेना अफ़ग़ानिस्तान, लेबनान और इराक़ में अस्थिरता पैदा करने का काम कर रही है. सख़्त संदेश अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस का कहना है कि इन प्रतिबंधों के ज़रिए अमरीका एक कड़ा संदेश देना चाहता है, “ईरान की इस्लामी रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर और उसकी ताक़तवर टुकड़ी कुद्स फ़ोर्स दूसरे देशों में अस्थिरता फैलाने का काम करते हैं."
"रिवॉल्यूशनरी गार्ड ईरान के परमाणु कार्यक्रम का समर्थन करती है, कुद्स फ़ोर्स आतंकवाद फैलाती है. यही कारण है कि अमरीकी क़ानून के मुताबिक अमरीका इन दोनों के ख़िलाफ़ क़दम उठा रहा है. हम ईरान के तीन सरकारी बैंकों, कुछ लोगों और संस्थाओं पर भी प्रतिबंध लगा रहे हैं.” ईरानी सेना का सबसे अहम हिस्सा हैं रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर और उस पर प्रतिबंध लगाने का असर इसीलिए पड़ेगा क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था का एक तिहाई हिस्सा उनके नियंत्रण में रहता है. ये नियंत्रण कुछ दूसरे संगठनों और ट्रस्ट के ज़रिए रहता है. इसका ये असर भी होता है कि जिन संगठनों पर प्रतिबंध होता है उनसे बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भी किसी भी तरह के आर्थिक रिश्ते रखने से डरती हैं लेकिन जहाँ तक ईरान की अंदरूनी राजनीति का सवाल है तो अमरीकी प्रतिबंधों से राष्ट्रपति अहमदीनिजाद के समर्थक ही और मज़बूत होंगे, कट्टरपंथियों को ये कहने का मौक़ा मिलेगा कि अमरीका ईरान के ख़िलाफ़ है. अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का जहाँ तक सवाल है तो अमरीका को आशा है कि ब्रिटेन और फ़्राँस जैसे देश उसका साथ देंगे. बीबीसी के कूटनीतिक मामलों के संवाददाता जोनाथन मार्कस कहते हैं कि ईरान के ख़िलाफ़ नए आर्थिक प्रतिबंध अमरीका की इराक़ नीति पर द्वंद्व को भी दर्शाते हैं एक तरफ़ अमरीका कह रहा है कि नए प्रतिबंध इसीलिए लगाए जा रहे हैं क्योंकि ईरान पड़ोसी देशों में आतंकवाद फैला रहा है लेकिन दूसरी तरफ़ इराक़ में अमरीकी सेना के कमांडर जनरल डेविड पेत्रेउस ने बीबीसी को हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि इराक़ में ईरान समर्थक चरमपंथियों के हमलों में कमी आई है. | इससे जुड़ी ख़बरें अली लारीजानी ने इस्तीफ़ा दिया20 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना पुतिन ने अहमदीनेजाद से मुलाक़ात की16 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना 'अमरीका हमला करने की स्थिति में नहीं'04 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना अहमदीनेजाद की कड़ी चेतावनी22 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना 'ईरान के साथ युद्ध के लिए तैयार रहें'16 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना 'परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा अहम लक्ष्य पूरा'02 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना ईरान पर और प्रतिबंध लगें: अमरीका24 मई, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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