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ईरान से वार्ता में अमरीका शामिल होगा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी नीति में एक बड़े बदलाव को दर्शाते हुए पहली बार एक वरिष्ठ अमरीकी मंत्री ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में उसके मुख्य वार्ताकार से मिलेंगे. अमरीका के सहायक विदेश मंत्री विलियम बर्न्स के वार्ता में हिस्सा लेने का मक़सद ईरान को उसके परमाणु संवर्द्धन कार्यक्रम रोकने के लिए मनाना है. वे ईरान के मुख्य वार्ताकार सईद जलीली से बात कर रहे यूरोपीय संघ के वार्ताकार हाविए सोलाना के साथ स्विटज़रलैंड जाएँगे. उस बैठक में ईरान से संयुक्त राष्ट्र की पेशकश पर अपना रुख़ साफ़ करने की उम्मीद की जा रही है. संयुक्त राष्ट्र ने ईरान को यूरेनियम संवर्द्धन कार्यक्रम रोकने पर कई तरह की मदद के पैकेज का प्रस्ताव रखा है. अमरीका का कहना है कि बर्न्स ईरानी वार्ताकार सईद जलीली से अलग से कोई बात नहीं करेंगे. वे मुख्य रूप से वहाँ सुनने का काम करेंगे. 'अमरीकी नीति में बदलाव' बीबीसी संवाददाता जोनाथन बील का कहना है कि अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज बुश के कार्यकाल में ऐसा पहली बार हो रहा है जिसे उनकी विदेश नीति में महत्वपूर्ण परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है. अमरीका यह कहता रहा है कि वह ईरान से तब तक कोई बातचीत नहीं करेगा जब तक कि वह अपने यूरेनियम संरर्द्धन कार्यक्रम को नहीं रोक देता.
अमरीका का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है जबकि ईरान इसका खंडन करता आया है और उसका कहना है कि उसका यूरेनियम संरर्द्धन कार्यक्रम ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमरीकी नीति में बदलाव स्पष्ट रूप से दिख रहा है क्योंकि बिना किसी पूर्व शर्त के अमरीकी मंत्री ईरानी अधिकारियों के साथ बैठने जा रहे हैं. लेकिन बुश प्रशासन इसे दूसरी तरह से पेश कर रहा है. उसका कहना है कि बैठक में बर्न्स पश्चिमी देशों की एकता दिखाने के लिए मौजूद रहेंगे. अमरीका का कहना है कि बर्न्स बैठक में इस तरह से शामिल होंगे ताकि वार्ता की उसकी पुरानी शर्तें बरक़रार रहें यानी वार्ता के लिए ईरान अपने कार्यक्रम को रोके. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमरीका का यह क़दम कितने नतीजे देगा इसका पता शनिवार को जेनेवा में होने वाली बैठक के बाद ही चलेगा. 'एक बार की हिस्सेदारी' अमरीका के विदेश विभाग के अधिकारियों ने बीबीसी से कहा कि तीसरे शीर्ष राजनयिक बर्न्स 'वार्ता की हमारी शर्तों को दुहराएँगे.' अधिकारी ने यह भी कहा, "बर्न्स इस बैठक में एक बार ही हिस्सा लेंगे." अमरीका विश्व के उन छह ताक़तवर देशों में है जिन्होंने ईरान को यूरेनियम संवर्द्धन रोकने पर आर्थिक मदद और सीधे संपर्क-वार्ता की पेशकश की है. लेकिन इससे पहले कभी अमरीका ने इस मसले पर ईरान से चल रही वार्ता में अपने किसी राजनयिक को नहीं भेजा था. ईरान के सामने यूरोपीय यूनियन के वार्ताकार हाविए सोलाना ने पिछले महीने यह प्रस्ताव रखा था. यह बैठक उस समय हो रही है जब ईरान के मिसाइल परीक्षण को लेकर तनाव बढ़ गया है. अमरीका और ईरान के बीच औपचारिक कूटनीतिक संपर्क 1979 की ईरानी क्रांति और तेहरान में अमरीकी दूतावास पर अमरीकी लोगों को बंदी बनाने के घटना के बाद ख़त्म हो गया था. |
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