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जुनूनी और जज़्बाती लोगों का नाइजीरिया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जुनूनी और जज़्बाती लोगों के देश में स्वागत है. अबुजा के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने के साथ जब इन पंक्तियों ने स्वागत किया तो लगा किसी ने कस कर हाथ मिलाकर उस शहर के अजनबीपन को पल में दूर कर दिया. बीबीसी की गाड़ी में बैठ कर जब आगे बढे़ तो लंबी चौड़ी साफ़ सड़कें और खूबसूरत इमारतें थीं...कहीं ट्रैफिक का शोर शराबा नहीं और खूब सारे हरे पत्तों से लदे पेड़ बारिश में और ताज़ा होते... यहाँ अभी सावन का महीना है ....हवा खूब गीली. अबुजा नया शहर है. 1979 से राजधानी के रूप में बसना शुरू हुआ इसीलिए बहुत करीने से सजा हुआ लगता है, बहुत व्यवस्थित. कुछ कुछ चंडीगढ और लुटियन दिल्ली की तरह. विकासशील देशों में मुख्य शहरों का खूबसूरत व्यवस्थित होना आम मध्यवर्ग परिवार के सजे हुए ड्राइंग रूम की तरह होता है. अबुजा का बाज़ार अंदर की कहानी तो कुछ और ही होती है. तो बस इसकी खोज में एक स्थानीय मित्र के साथ निकले यहाँ के सबसे बडे़ खुले बाज़ार में. इसे अब गार्की मार्केट के नाम से जाना जाता है.
यहाँ का आलम तो बस पूछिए मत. अभी तक लगता था कि रंगों के मामले में भारत से आगे शायद कोई नहीं होगा लेकिन यहां तो नज़ारा ही अलग था. क्या चीज़ों के रंग और क्या कपड़ों के रंग. महिलाएं ज़्यादातर ग़रीब थीं लेकिन जो भी पहना था खूब चटक रंग वाला. सर को साफ़े में बांधे हुए. यूं तो अफ्रीका का समाज भारतीय समाज की तरह पितृसत्तात्मक है लेकिन बाज़ार में औरतें खुल कर बात करने के लिए राजी थीं. सूखी मछलियों का तो अंबार था जैसे सूखी लकडियों की टाल हो. जिमीकंद की तरह दिखता है यैम जो यहां के स्थानीय समाज में बहुत लोकप्रिय है. कम से कम पांच किलो का वजन होता है इसका. महिलाओं की छवि यहाँ एक दिलचस्प बात यह है कि मापने के लिए कोई तराजू नहीं होता बल्कि टीन की छोटी बडी कटोरियां जिसे मुडु कहते हैं.
यहाँ खाना पाम ऑयल में पकाया जाता है. एक बात और जो अनोखी थी वो थी महिला व्यापारियों की बड़ी तादाद. हर औरत खूब उत्साह से हमसे बात करने को राजी होती. भारत के बारे में पूछने पर ज़िक्र बॉलीवुड का ही होता. आशा पारेख , अमिताभ बच्चन धर्मेंद्र से लेकर शाहरुख और ऐश्वर्या से भी परिचत हैं वे. फिल्मों को देखकर इन्हें लगता है कि भारत में महिलाओं और बच्चों को बहुत प्यार से रखा जाता है. एक प्यारी सी रंगीन साफ़े में बंधी महिला ने कहा, भारत में महिलाएं राजा हैं... अच्छा लगा सुनकर ... झूठ ही सही क्या बुरा है? |
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