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मसाई लोगों के देश में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कीनिया की बात करते हैं तो एक तस्वीर उभरकर आती है और वह है लाल चेक का "चूका" या एक कंबलनुमा वस्त्र ओढ़े, भाले और तीर-कमान लिए, कानों में बड़ी-बड़ी बाली पहने मसाई पुरुषों की और थालीनुमा मोतियों से जड़ी मालाएँ पहननेवाली मसाई महिलाओं की. मध्य कीनिया और तंज़ानिया सीमा पर मसाई लोग बसते हैं. आधुनिक जीवन से ये अब भी अछूते हैं और कीनिया के जो मुख्य कबीले हैं उनमें शायद ये ऐसा अकेला कबीला है जिसने अपनी परंपरा, जीवनशैली, खानपान और पोशाक को नहीं बदला है. आम तौर पर इन्हें एक लड़ाकू जनजाति माना जाता है. शायद जितने बड़े ये लड़ाके हैं उससे ज़्यादा ऐसी इनकी छवि है. जानवरों का खून और दूध इनके खानपान का मुख्य हिस्सा है. आम तौर पर ये चरवाहों का काम करते हैं. ये लोग ज़मीन खोदने के खिलाफ़ हैं इसलिए खेती करना पसंद नहीं करते. यहाँ तक कि ज़मीन खोदने से बचने के लिए ये अपने मृतकों को भी जानवरों के हवाले छोड़ देते हैं. इनमें से कुछ लोग राजधानी नैरोबी के आस-पास रहते हैं और शहर के अलग-अलग इलाकों में हाट-बाज़ार लगाते हैं. एक मसाई शिल्पकार बताता है कि वो कैसे हाथ से पत्थरों पर कलाकृति बनाता है और नैरोबी के स्थानीय लोगों और सैलानियों को बेचता है. यहाँ लगे एक बाज़ार में मैं जब पहुँची तो पूरी तरह शहरी हो चुकी मसाई युवती ने अंग्रेज़ी में मुझे सामान बेचने की कोशिश की. उसका कहना था कि वह चाहती है कि उसके पास भी मेरी तरह पैसे हों. यहाँ लकड़ी के मुखौटे, जिराफ़, कबीलाई लोगों की आकृति, मोती के खूबसूरत आभूषणों के अलावा टोकरियाँ और बैग बेचती ये महिलाएँ गाना गाकर अपना समय अच्छे से बिताती हैं. जितनी सुंदर इनकी कला है उससे लगता है कि मेरी जेब भी यहाँ खाली होने जा रही है. |
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