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सोमवार, 31 जनवरी, 2005 को 16:54 GMT तक के समाचार
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कीनियाः अमीर-ग़रीब की खाई

नैरोबी
नैरोबी को देखकर असलियत का पता नहीं चलता
अफ्रीकी देश कीनिया की राजधानी नैरोबी में 25 लाख लोग रहते हैं. हवाई अड्डे से शहर की ओर बढ़ते हुए मुझे बड़ी-बड़ी इमारतें नज़र आईं. बड़ी-बड़ी विदेशी कंपनियों के दफ्तर और बड़ी चमकदार गाड़ियाँ.

नैरोबी कोई ज़्यादा पुराना शहर नहीं है. कोई सौ साल पहले इसे बसाया गया. 1890 तक तो यह एक दलदल था पर पूर्वी-अफ्रीका रेलवे के निर्माण के समय एक छोटी-सी जल धारा के पास एक डिपो बनाया गया. फिर नैरोबी, युगांडा रेलवे का केंद्र बन गया.

अँग्रेज़ों ने अपनी राजधानी समुद्र तट पर स्थित मोमबासा से हटाकर, समुद्र तट से 500 फीट ऊपर स्थित नैरोबी को बना दिया. वो ज़माना था जब यहाँ गैंडे और शेर शहर में खुलेआम घूमा करते थे.

आज यहाँ बड़ी तादाद में यूरोपीय और भारतीय रहते हैं. आप कह सकते हैं कि असल में एक शहर में दो शहर बसते हैं.

एक शहर उनका, जिनके घर देखकर आँखे चौंधिया जाती है. यहाँ आप अमीर हैं तो आपके पास मर्सिडीज बेंज कार ज़रूर होगी और अगर आप अमीर हैं और युवा भी तो फ़ोरव्हील ड्राइव के बिना आप समाज में अपना सिक्का कैसे जमा पाएँगे.

दूसरी ओर, एक और ही नैरोबी दिखाई देता है जिसके लोग इतने गरीब हैं कि हर रोज़ एक डॉलर से कम कमाते हैं.

आप शहर में कहीं भी निकल जाएँ आपको मतातु मिल जाएँगे. ये मिनी बस है जो कि सार्वजनिक यातायात का ज़रिया है.

इनकी चाल ऐसी कि आप की जान की खैर नहीं. इनमें बैठकर शहर का दूसरा ही नज़ारा मिलता है.

ग़रीबी

सड़क किनारे विदेशी कपड़ों की दुकानें, चौंकिए मत ये नए नहीं पुराने कपड़ों, जूतों, घर के सामानों की दुकानें हैं जो कि यहाँ के ग़रीब नैरोबीवासी खरीदते और इस्तेमाल करते हैं.

नैरोबी
अमीर-ग़रीब का फ़र्क भारत जैसा ही है

ग़रीबी ऐसी है कि लाल बत्ती पर आपको लोग टीवी एंटेना, खरगोश और कुत्ते बेचते हुए मिल जाएँगे. इनकी आपसे ये आशा रहती है कि खरीदें या न खरीदें, आप इन्हें कुछ पैसे ही दे दें.

वहीं यहाँ के अमीर बड़े शॉपिंग मालों में जाते हैं, एक से एक विदेशी सामान यहाँ बिकता है.

समाज के दो हिस्सों के बीच खाई इतनी गहरी है कि यहाँ अपराध बहुत होते हैं. लोग इसे नैरोबी कहते हैं.

आपको हर तरफ से चेतावनी मिलती है कि सोने के आभूषण मत पहनिए, पैसे संभाल कर रखिए.

यहाँ के बड़े-बड़े घर कैदखानों से कम नहीं. सभी इमारतों के किनारे बाड़ लगाई जाती है, जैसी हम लोग भारत-पाकिस्तान सीमा पर लगाते हैं.

घर के अंदर ताले में बंद लोग बिगड़ती कानून-व्यवस्था से चिंतित रहते हैं. अगर स्थिति से कोई ज़रा खुश है तो शायद सुरक्षा मुहैया कराने वाली कंपनियाँ. हों भी क्यों न, यहाँ उनकी कमाई बहुत अच्छी है.

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