| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
'बिकाऊ हैं कीनिया के जज'
कीनिया में एक प्रमुख अख़बार ने दावा किया है कि देश की न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का बोलबाला है और कोई दो लाख रुपए की रिश्वत पर किसी जज का फ़ैसला बदलवाया जा सकता है. 'डेली नेशन' अख़बार ने देश के मुख्य न्यायाधीश को सौंपी गई एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि कीनिया में किसी मजिस्ट्रेट को मात्र चार हज़ार डॉलर देकर 'खरीदा' जा सकता है. इस रिपोर्ट के प्रकाशन ने देश की न्याय व्यवस्था में सुधारों के लिए सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है. रिपोर्ट के अनुसार कीनिया के जजों में से आधे भ्रष्ट हैं. अख़बार ने बाक़ायदा एक सूची प्रकाशित की है जिसमें लिखा गया है कि कौन सा जज कितने में बिकाऊ है. जाँच रिपोर्ट के प्रकाशन के बाद देश के मुख्य न्यायाधीश इवान्स गिचेरू ने भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच के आदेश दिए हैं. उन्होंनें ऐसे जजों से इस्तीफ़ा देने की अपील की है जिनका जाँच में फँसना तय है.
गिचेरू ने कहा, " जो भ्रष्ट हैं वो ख़ुद जानते हैं. विकल्प उनके पास है. वे या तो इस्तीफ़ा दे दें या फिर उनसे निपटा जाएगा." उन्होंने राष्ट्रपति से पूरे मामले की जाँच के लिए एक ट्राइब्युनल के गठन की अपील की है. उल्लेखनीय है कि पिछले दिसंबर में राष्ट्रपति म्वाई किबाकी ने देश में भ्रष्टाचार के ख़ात्मे के वायदे के साथ सत्ता ग्रहण किया था. दरअसल भ्रष्टाचार के मामलों के कारण अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और अन्य दाता संगठन ने कीनिया को कर्ज़ देना बंद कर दिया था. इसी सप्ताह लॉ सोसायटी ऑफ़ कीनिया ने सभी भ्रष्ट जजों को बर्ख़ास्त किए जाने की माँग की थी. सोसायटी ने जज आरोन रिन्गेरा की रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने के बाद यह माँग की थी. माना जाता है कि जजों की 'कीमत' रिपोर्ट के दूसरे हिस्से में है जिसे कि प्रकाशित नहीं किया गया है. 'डेली नेशन' ने रिपोर्ट की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से लिखा है कि जजों का भाव उनके पद और किसी मामले की गंभीरता से सीधे जुड़ा होता है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||