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अंतरिक्ष स्टेशन पहुँचा अटलांटिस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरिक्ष यान अटलांटिस सफलतापूर्वक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुँच गया है. भारतीय मूल की अमरीकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स इसी यान से वापस लौटेंगी. अटलांटिस के इस सफर को मंगल पर आदमी भेजने के मिशन का हिस्सा माना जा रहा है. यान ने सात अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर फ़्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से शुक्रवार को उड़ान भरी थी. अटलांटिस का इस साल का यह पहला अभियान है. अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में पिछले वर्ष दिसंबर से मौजूद भारतीय मूल की अमरीकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स इसी यान से वापस लौटेंगी. अटलांटिस अंतरिक्ष स्टेशन में एक सप्ताह तक रुकेगा और इस दौरान अंतरिक्ष यात्री वहाँ सोलर पैनल स्थापित करेंगे. इस काम के लिए अंतरिक्ष यात्री तीन बार अंतरिक्ष में चहलक़दमी यानी स्पेसवॉक करेंगे. हर बार यह स्पेसवॉक छह घंटे से अधिक का होगा. थर्मल ब्लेंकेट अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का कहना है कि शुक्रवार को प्रक्षेपण के दौरान यान के थर्मल ब्लेंकेट को मामूली नुक़सान पहुँचा था. दरअसल, ये थर्मल ब्लेंकेट एक ऐसा कवच है जो पृथ्वी के वायुमंडल में यान के प्रवेश के दौरान भारी घर्षण से पैदा हुई ऊष्मा के कारण यान को आग लगने जैसी दुर्घटना से बचाता है. हालाँकि नासा का कहना है कि ये नुक़सान मामूली है और इससे घबराने की ज़रूरत नहीं है.
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2003 में अंतरिक्ष यान पृथ्वी पर वापस लौटते हुए दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और इस हादसे की वजह ऊष्मारोधी टाइलों का क्षतिग्रस्त होना बताया गया था. नासा को इस समय तक दूसरा अभियान भेजना था और अटलांटिस को मार्च में ही भेजने की योजना थी लेकिन फरवरी के अंत में ओलावृष्टि से यान का ईंधन टैंक क्षतिग्रस्त हो गया था और उसकी मरम्मत करने में तीन महीने लग गए. हालांकि विलंब होने के बावजूद नासा को भरोसा है कि 100 अरब डॉलर की लागत से बनने वाले अंतरिक्ष स्टेशन को 2010 में यानों के बेड़े की समय अवधि पूरा होने से पहले हर हाल में तैयार कर लिया जाएगा. नासा की योजना अंतरिक्ष स्टेशन के लिए दर्जन भर से अधिक और अभियान भेजने की है ताकि वहाँ कल-पुर्जों और दूसरे सामान की आपूर्ति पूरी की जा सके. अभियान अटलांटिस के इस अभियान का उद्देश्य इस साल के अंत में अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ने वाले यूरोप के कोलंबस के लिए आवश्यक तकनीकी जरूरतों को पूरा करना है. इस यान से गए सात अंतरिक्ष यात्रियों में से एक क्लेटन एंडरसन चार महीने के लिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर रुक जाएंगे, जबकि वहाँ दिसंबर से ही मौजूद फ्लाइट इंजीनियर सुनीता विलियम्स लौट आएंगी. ग़ौरतलब है कि पिछले वर्ष 10 दिसंबर को अंतरिक्ष यान डिस्कवरी से सुनीता और छह अन्य अंतरिक्ष यात्रियों ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए उड़ान भरी थी. सुनीता की पैदाइश अमरीका के ओहायो में 1965 में हुई थी. उनके पिता 1958 में अहमदाबाद से अमरीका जाकर बस गए थे. सुनीता के पिता दीपक पांड्या और माँ बोनी पांड्या मैसाचुसेट्स राज्य के फ़ाल्मथ शहर में रहते हैं. सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष विज्ञान का ख़ासा ज्ञान रखती हैं और रूस में उन्होंने लंबे समय तक काम किया है. |
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